कौन थे संत वैलेंटाइन... क्यों चढ़ाया गया था फांसी पर... मरने से पहले प्रेमिका को खत में लिखा था, योर Valentine... जानें 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाने के पीछे की पूरी कहानी

Valentine Day Story: 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाने को लेकर दुनियाभर के युवाओं में उत्साह है. इस दिन प्यार करने वाले जोड़े एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं, अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं और गिफ्ट देते हैं. आइए जानते हैं आखिर कौन थे संत वैलेंटाइन और क्यों इनके मरने वाले दिन मनाया जाता है वैलेंटाइन डे?

Valentine Day 2026
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

Valentine's Day is on February 14th: हर साल पूरी दुनिया में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है. इस साल भी इस दिवस को मनाने को लेकर उत्साह है. इस दिन प्यार करने वाले जोड़े एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं. अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं और गिफ्ट देते हैं. इसके चलते बाजार लाल गुलाब, लव ग्रीटिंग्स कार्ड और तरह-तरह के गिफ्ट से सजे हुए हैं. युवा इनकी खूब खरीदारी भी कर रहे हैं. क्या आप जानते हैं कि वैलेंटाइन डे क्यों और किसकी याद में मनाया जाता है. यदि नहीं, तो हम आपको बता रहे हैं वैलेंटाइन डे मनाने के पीछे की पूरी कहानी.

किसकी याद में मनाया जाता है वैलेंटाइन डे 
वैलेंटाइन वीक के हर दिन को खास तरीके से मनाया जाता है और अंत में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर किसकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है. आपको मालूम हो कि वैलेंटाइन डे रोम के एक पादरी वैलेंटाइन की याद में मनाया जाता है. प्रेम और इंसानियत के लिए संत वैलेंटाइन ने अपने प्राण तक दे दिए थे. संत वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ाने वाले दिन को ही वैलेंटाइन डे के रूप में दुनिया भर में मनाया जाता है. 

संत वैलेंटाइन को क्यों दी गई थी मौत की सजा 
तीसरी शताब्दी में रोम पर सम्राट क्लॉडियस द्वितीय का राज था. उस समय चारों और काफी युद्ध चल रहा था. ऐसे में सम्राट क्लॉडियस द्वितीय एक बड़ी सेना की जरूर थी. क्लॉडियस अपने देश की सैन्य क्षमता को बढ़ाने चाहते थे. क्लॉडियस का मानना था कि अविवाहित सैनिक शादीशुदा सैनिकों की तुलना में अच्छे योद्धा साबित हो सकते हैं क्योंकि उनको परिवार की चिंता नहीं होती. अपनी इसी सोच के चलते सम्राट क्लॉडियस द्वितीय ने रोम में विवाह बंद करवा दिए. सम्राट के इस आदेश से रोम के लोग काफी दुखी हो गए. प्रेम करने वालों पर तो मानों दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. पादरी वैलेंटाइन को भी सम्राट क्लॉडियस का यह आदेश पसंद नहीं था. वैलेंटाइन ने रोम के सैनिकों व लोगों को राजा के इस आदेश को नहीं मानने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया. 

संत वैलेंटाइन इतने से ही चुप नहीं रहे बल्कि वह छिपकर प्रेमी जोड़ों का विवाह ईसाई पंरपरा से कराते रहे.  संत वैलेंटाइन का मानना था कि प्रेम कोई अपराध नहीं, बल्कि भगवान की देन है. कुछ समय बाद राजा क्लॉडियस को जब इस बारे में पता चला तो वह संत वैलेंटाइन पर बहुत ही क्रोधित हुआ. राजा ने वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर फांसी की सजा देने का फरमान सुना दिया. संत वैलेंटाइन को राजा के आदेश के उल्लंघन और विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. जेल के अंदर वैलेंटाइन अपनी मौत की तारीख का इंतजार कर रहे थे और एक दिन उनके पास जेलर आया. रोम के लोगों का कहना था की वैलेंटाइन के पास एक दिव्य शक्ति थी, जिससे वो लोगों को रोगों से मुक्ति दिला सकते थे. जेलर की एक अंधी बेटी थी और उसे वैलेंटाइन के पास बसी जादुई ताकात के बारे में पता था इसलिए उसने वैलेंटाइन से मदद मांगी. वैलेंटाइन ने जेलर की अंधी बेटी की आंखों को अपनी शक्ति से ठीक कर दिया. उस दिन के बाद से वैलेंटाइन और जेलर के बेटी के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी और वो दोस्ती कब प्यार में बदल गई उन्हें पता ही नहीं चला.

अपनी प्रेमिका को खत में लिखा था योर वेलेंटाइन
जेलर की बेटी को वैलेंटाइन को फांसी दी जाने वाली है, इस बात को सोच-सोचकर गहरा सदमा लग गया था. आखिरकार वो दिन 14 फरवरी आ गया था, जिस दिन वैलेंटाइन को फांसी लगने वाली थी. फांसी पर चढ़ने से पहले वैलेंटाइन ने अपनी प्रेमिका के लिए एक खत लिखा, खत के अंत में लिखा था, ‘योर वेलेंटाइन’. यही विश्व का पहला वैलेंटाइन संदेश माना जाता है. कहा जाता है 270 ईस्वी में 14 फरवरी के दिन संत वैलेंटाइन को फांसी दी गई थी. रोमवासियों को संत वैलेंटाइन को फांसी पर लटकाना सही नहीं लगा. उन्होंने संत वैलेंटाइन की फांसी के दिन यानी 14 फरवरी को हर साल प्यार के दिन के रूप में मनाना शुरू कर दिया. पोप गेलैसियस ने 496 ईस्वी में इस तारीख को वैलेंटाइन डे के रूप में मनाने का ऐलान कर दिया. इसके बाद पूरी दुनिया में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाने लगा. 

 

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