Humidity in cloudy Weather: बादल छाए रहने पर भी क्यों आता है पसीना? साइंस की मदद से समझें मौसम का पूरा खेला

आसमान में बादल छा जाने का मतलब हमेशा ठंडा मौसम नहीं होता. कई बार हवा में बढ़ी नमी के कारण पसीना सूख नहीं पाता और उमस बढ़ जाती है. यही वजह है कि बिना तेज धूप के भी शरीर चिपचिपा रहता है, थकान महसूस होती है और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है.

humidity in cloudy weather
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

आसमान में बादल छा जाएं तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि अब मौसम ठंडा हो जाएगा और गर्मी से राहत मिलेगी. लेकिन कई बार ऐसा बिल्कुल नहीं होता. बाहर धूप नहीं होती, फिर भी शरीर से लगातार पसीना निकलता रहता है और उमस इतनी बढ़ जाती है कि कुछ मिनट बाहर खड़े रहना भी मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब सूरज की तेज किरणें सीधे शरीर पर नहीं पड़ रहीं, तो आखिर इतना पसीना क्यों आता है? इसका जवाब मौसम विज्ञान और हमारे शरीर की कार्यप्रणाली, दोनों में छिपा है.

बादल होने के बाद भी पसीना क्यों आता है?
हमारे शरीर का सामान्य तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस रहता है. जब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तो त्वचा में मौजूद स्वेद ग्रंथियां (Sweat Glands) पसीना निकालना शुरू कर देती हैं. यह शरीर को नेचुरल तरीके से ठंडा करता है. इसको ऐसे समझिए, जब किचन का तापमान बढ़ जाता है तो हम एग्जॉस्ट चला देते हैं. शरीर भी ऐसे ही गर्मी में काम करता है. 

लेकिन सिर्फ गर्मी ही पसीने की वजह नहीं होती. कई बार हवा में मौजूद नमी यानी ह्यूमिडिटी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. बरसात से पहले या बादल छाए रहने के दौरान हवा में जलवाष्प की मात्रा काफी बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में त्वचा पर नमी चिपक सकती है, जिससे निकला पसीना आसानी से सूख नहीं पाता.

आमतौर पर जब पसीना सूखता है, तभी शरीर की गर्मी बाहर निकलती है और ठंडक महसूस होती है. लेकिन जब हवा पहले से ही नमी से भरी हो तो पसीने का वाष्पीकरण (evaporation) धीमा हो जाती है और नतीजा यह होता है कि पसीना शरीर पर चिपका रहता है, जिससे कपड़े गीले होने लगते हैं और उमस पहले से ज्यादा महसूस होने लगती है.

बादल और उमस का क्या है वैज्ञानिक संबंध?
बादल सूरज की कुछ किरणों को जरूर रोकते हैं, लेकिन वे हवा में मौजूद नमी को कम नहीं करता. कई बार बारिश से पहले वातावरण में नमी तेजी से बढ़ जाती है. इसी वजह से तापमान बहुत ज्यादा न होने पर भी मौसम चिपचिपा लगने लगता है. अगर हवा तेज चल रही हो तो पसीना जल्दी सूख जाता है. लेकिन जब हवा की रफ्तार कम हो और नमी ज्यादा हो, तब शरीर को ठंडक पहुंचाने वाली प्रक्रिया लगभग रुक जाती है. यही कारण है कि बादलों वाले दिन भी लोगों को तेज गर्मी जैसी बेचैनी महसूस हो सकती है.

इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है?
लगातार उमस रहने पर शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे जरूरत से ज्यादा पसीना निकल सकता है और शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है. ऐसी स्थिति में थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ता है. अगर लंबे समय तक गर्म और नम वातावरण में रहा जाए तो हीट एक्सहॉशन या हीट स्ट्रेस का खतरा भी बढ़ सकता है.
 

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