अगर आप सड़क किनारे रेस्टोरेंट्स के सामने से गुजरे हों, तो सबसे पहले आपकी नजर लाल और पीले रंग वाले बोर्ड पर ही जाती होगी. मैकडॉनल्ड्स, केएफसी, बर्गर किंग और कई दूसरे फास्ट फूड ब्रांड्स सालों से इन्हीं रंगों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. क्या ये रंग सच में भूख बढ़ाते हैं या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? आइए समझते हैं.
सबसे पहले नजर खींचते हैं लाल और पीला रंग
लाल और पीला दोनों ऐसे रंग हैं जो दूर से भी आसानी से दिखाई देते हैं. यही वजह है कि सड़क किनारे लगे बड़े-बड़े साइनबोर्ड, मॉल या भीड़भाड़ वाले इलाकों में ये रंग लोगों का ध्यान जल्दी खींच लेते हैं. फास्ट फूड कंपनियों के पास ग्राहक का ध्यान आकर्षित करने के लिए सिर्फ कुछ सेकंड होते हैं, इसलिए ये रंग उनके लिए सबसे असरदार साबित होते हैं.
क्या ये रंग सच में भूख बढ़ाते हैं?
अक्सर कहा जाता है कि लाल और पीला रंग लोगों को ज्यादा भूख महसूस कराते हैं. लेकिन कोई भी एक रंग सीधे तौर पर भूख नहीं बढ़ाता. असल में ये रंग लोगों के मूड और सोच पर हल्का असर डालते हैं. लाल रंग ऊर्जा, उत्साह और तेजी का एहसास कराता है, जबकि पीला रंग खुशी, गर्मजोशी और अपनापन दिखाता है. दोनों मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं जो फास्ट फूड ब्रांड्स की पहचान से मेल खाता है.
फास्ट फूड बिजनेस में कलर कॉम्बिनेशन जरूरी?
फास्ट फूड रेस्टोरेंट्स का मकसद होता है कि ग्राहक जल्दी आए, जल्दी ऑर्डर करे और जल्दी खाना खाकर निकल जाए. इसलिए सिर्फ रंग ही नहीं, बल्कि लाइटिंग, सीटिंग, मेन्यू बोर्ड और पूरे रेस्टोरेंट का डिजाइन भी इसी सोच के साथ तैयार किया जाता है.
ब्रांड को याद रखने में भी मदद करते हैं ये रंग
मार्केटिंग एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी ब्रांड को पहचानने में रंगों की बड़ी भूमिका होती है. कई बच्चे मैकडॉनल्ड्स का पीला 'एम' (Golden Arches) पढ़ना सीखने से पहले ही पहचान लेते हैं. लगातार एक जैसे रंग देखने से लोगों के दिमाग में उस ब्रांड की मजबूत पहचान बन जाती है. यही वजह है कि कई बार लोग सिर्फ रंग देखकर ही ब्रांड पहचान लेते हैं.
फिर भी लाल और पीला क्यों नहीं छोड़ रहे बड़े ब्रांड?
डिजाइन ट्रेंड बदलने के बावजूद लाल और पीले रंग की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ये रंग दूर से तुरंत नजर आते हैं, लोगों के मन में सकारात्मक भावना पैदा करते हैं और ब्रांड को आसानी से याद रखने में मदद करते हैं. यानी इनका मकसद लोगों को जबरन भूख लगाना नहीं, बल्कि कुछ ही सेकंड में ब्रांड की पहचान बनाना है.
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