भारतीय घरों, दुकानों और वाहनों के बाहर अक्सर एक धागे में पिरोया हुआ नींबू और सात हरी मिर्च दिख जाती हैं. बचपन से देखी जा रही इस परंपरा को कोई अंधविश्वास कहता है, तो कोई इसे गहरी आस्था और संस्कृति से जोड़कर देखता है. लेकिन सवाल वही है, क्या यह सिर्फ मान्यता है, या इसके पीछे कोई सोच भी छुपी है?
हमारे पूर्वज हर परंपरा को बिना कारण नहीं अपनाते थे. उनके लिए प्रकृति ही सबसे बड़ा विज्ञान थी. नींबू और मिर्च लटकाने की परंपरा भी उसी सोच से निकली मानी जाती है जहां घर, व्यापार और परिवार को नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए प्राकृतिक उपाय अपनाए जाते थे. यही कारण है कि यह परंपरा आज भी जीवित है.
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव की मान्यता
लोगों की मान्यता के अनुसार नींबू की खटास और मिर्च की तीखापन मिलकर नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर अपने भीतर समाहित कर लेते हैं. माना जाता है कि इससे बुरी नज़र और जलन से पैदा होने वाले दुष्प्रभाव घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते. यही वजह है कि लोग इसे सुख-शांति से जोड़कर देखते हैं.
सफलता, तरक्की और खुशहाली अक्सर दूसरों की नज़रों में खटक जाती है. ऐसी मान्यता है कि नकारात्मक सोच और ईर्ष्या से निकलने वाली ऊर्जा घर-परिवार को प्रभावित कर सकती है. नींबू और मिर्च को इन प्रभावों से सुरक्षा कवच माना गया है, जो बाहर ही इन तरंगों को डिस्ट्रॉय कर देता है.
विज्ञान से जुड़ा एक व्यावहारिक पहलू
परंपरा के साथ-साथ इसका एक व्यावहारिक पक्ष भी बताया जाता है. नींबू और हरी मिर्च में मौजूद तत्वों की तीखी गंध कीड़े-मकोड़ों को दूर रखने में मदद करती है. पुराने समय में जब आधुनिक कीटनाशक उपलब्ध नहीं थे, तब यह एक प्राकृतिक उपाय के रूप में उपयोगी माना जाता था, खासकर दुकानों और अनाज भंडारण के पास.
सात मिर्च ही क्यों?
सात का अंक भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है. सप्ताह के सात दिन, इंद्रधनुष के सात रंग और जीवन के कई पहलुओं में यह संख्या बार-बार दिखाई देती है. इसी कारण नींबू के साथ सात हरी मिर्च लगाने की परंपरा बनी, ताकि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और सकारात्मकता बनी रहे.