माइग्रेन से परेशान थी महिला...ठीक करने के लिए मछली का गॉल ब्लैडर कच्चा चबा गई, जान पर बन आई

मछली के पित्त को पकाने या शराब में भिगोने से उसका जहरीलापन खत्म नहीं होता. डॉक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे अंधविश्वास और झूठे घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें.

Woman swallows raw fish gallbladder
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST
  • सिरदर्द का घरेलू इलाज पड़ा भारी
  • सिरदर्द ठीक करने के चक्कर में मौत के करीब पहुंची महिला

चीन के जियांगसू प्रांत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सिरदर्द से राहत पाने के लिए एक महिला ने ऐसा नुस्खा अपनाया कि उसकी जान पर बन आई. महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा. चलिए जानते हैं पूरा मामला.

अंधविश्वास के चक्कर में फंसी महिला
जियांगसू प्रांत की रहने वाली 50 वर्षीय लियू लंबे समय से सिरदर्द से परेशान थीं. लोक मान्यताओं के अनुसार, कच्ची मछली का गॉल ब्लैडर शरीर की गर्मी निकालने, डिटॉक्स करने और सिरदर्द ठीक करने में मदद करता है. इसी विश्वास के चलते महिला ने एक सुबह करीब 2.5 किलो की ग्रास कार्प मछली खरीदी, घर जाकर उसका पित्त निकाला और बिना पकाए निगल लिया.

दो घंटे में बिगड़ी हालत
पित्त निगलने के महज दो घंटे बाद ही लियू को तेज उल्टियां, दस्त और पेट में दर्द शुरू हो गया. हालत बिगड़ती देख परिवार वाले तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे. जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला का लिवर फेलियर हो गया है.

आईसीयू में 5 दिन तक चला इलाज
महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया. वहां डॉक्टरों ने प्लाज्मा एक्सचेंज थेरेपी और कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी दी, जो खून को धीरे-धीरे साफ करने की प्रक्रिया होती है. करीब पांच दिन के इलाज के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.

महिला का इलाज करने वाले डॉक्टर हू झेनकुई ने बताया कि मछली का पित्त आर्सेनिक से भी ज्यादा जहरीला होता है. उन्होंने कहा कि जरा सा पित्त ही किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार करने के लिए काफी है, जबकि 5 किलो या उससे ज्यादा वजन की मछली का पित्त जानलेवा भी हो सकता है. इसमें मौजूद टॉक्सिन लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लिवर फेलियर, किडनी फेलियर, शॉक, ब्रेन हैमरेज और यहां तक कि मौत भी हो सकती है.

पकाने या शराब में डालने से भी नहीं खत्म होता जहर
डॉक्टर ने यह भी बताया कि मछली के पित्त को पकाने या शराब में भिगोने से उसका जहरीलापन खत्म नहीं होता. डॉक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे अंधविश्वास और झूठे घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें.

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
चीन में पहले भी कई लोग कच्चा मछली का पित्त खाने के कारण अस्पताल पहुंच चुके हैं. मध्य चीन के हुबेई प्रांत में एक महिला तीन दिन तक दस्त से पीड़ित रही, यह सोचकर कि शरीर की गर्मी निकल रही है. जब वह अस्पताल पहुंची, तब तक उसके लिवर और किडनी को नुकसान हो चुका था.


 

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