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Jharkhand News: महिला को हो चुका था अंतिम संस्कार, 7 साल बाद लौटी जिंदा, हैरान हुआ परिवार, जानें पूरा मामला

जिस महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया था, वह महिला सात साल बाद वापस घर लौट आई तो परिवार हैरान हो गया. यह मामला झारखंड के लोहरदगा का है. सात साल पहले बिना शव देखे कपड़ों के आधार पर लावारिस महिला की लाश को डफली की लाश समझ लिया गया था.  मुंबई की एक संस्था की पहल से डफली उरांव अपने पैतृक घर पहुंचीं. 

Dafli Oraon reached her home
सत्यजीत कुमार
  • रांची,
  • 03 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST

झारखंड के लोहरदगा में एक ऐसी महिला घर लौट आई, जिसे सात साल पहले ही परिजन मृत समझकर अंतिम संस्कार कर चुके थे. लोहरदगा शहर के कुटमू की रहने वाली 45 साल की डफली उरांव, जिसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, करीब सात साल पहले घर से कहीं चली गई थी. इसकी गुमशुदगी की सूचना परिवार वालों ने लोहरदगा थाना में दर्ज कराई थी. कुछ समय बाद कुडू थाना क्षेत्र में मिली एक लावारिस मृतक महिला के कपड़े परिवार वालों को दिखाए गए. कपड़े डफली के कपड़ों से मिलते जुलते थे और यहीं पर परिजनों को पहचानने में गलती हो गई. उन्होंने उस लावारिस महिला को ही डफली मानकर अंतिम संस्कार कर दिया. 

वक्त के साथ डफली की मौत का गम भूल बैठे थे परिजन
हालांकि परिवार वालों का कहना है कि उन्हें पुलिस ने यह कहकर शव नहीं दिखाया था कि काफी दिन गुजर जाने के कारण शव की हालत बेहद खराब थी और उसे वहीं दफन कर दिया गया था. परिवार के लोग वक्त के साथ डफली की मौत का गम भूल बैठे थे. मगर इन्हें क्या पता था कि जिसे वह मृत मान बैठे हैं, वह जिंदा है और भटकती हुई दूसरे राज्य पहुंच गई है. कहानी में ट्विस्ट तब आया जब सात साल बाद मुंबई की श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन की टीम डफली उरांव को लेकर उनके पैतृक घर पहुंची. संस्था के सदस्यों ने बताया कि वे सड़क पर बेसहारा घूमने वाले और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को अपने संरक्षण में लेकर उनका उपचार और पुनर्वास करते हैं. संस्था के सदस्यों के अनुसार, वर्ष 2026 में डफली उरांव ओडिशा के खुर्दा स्थित मिशन आसरा के माध्यम से उनके संपर्क में आई थीं. 

ऐसे लगाया परिवार का पता
उपचार और देखभाल के दौरान महिला ने अपना पता लोहरदगा के कुटमू के रूप में बताया. इसके बाद संस्था ने जानकारी जुटाकर उनके परिवार का पता लगाया और उन्हें लेकर लोहरदगा पहुंची. घर पहुंचने पर डफली के भाई और मां ने उन्हें पहचान लिया. सात साल बाद बेटी को जीवित और सामने देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. जिस घर में वर्षों पहले मातम छा गया था, उसी घर में अचानक खुशियां लौट आईं. आसपास के लोग भी इस असाधारण घटना को लेकर हैरान नजर आए. मगर अब डफली के परिवार वाले कह रहे हैं कि पुलिस द्वारा यदि उस समय महिला की पहचान की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट तरीके से कराई गई होती और शव दिखाकर पुष्टि कराई जाती, तो परिवार को सात वर्षों तक इस गलतफहमी में नहीं रहना पड़ता. कपड़ों के आधार पर हुई पहचान ने अब पूरी घटना को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. डफली के लापता होने के बाद उनके पति की भी मौत हो चुकी है. मगर परिवार वाले इसे जिंदा वापस हैरत और खुशी से भरे हुए हैं.

 

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