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Bhilai Ganesh Kalyanam Utsav: विवाह में आ रही है अड़चन? भिलाई के इस 70 साल पुराने दक्षिण भारतीय मंदिर में बप्पा की बारात में शामिल होते ही बनते हैं शादी के योग

रघुनंदन पंडा
  • दुर्ग,
  • 21 सितंबर 2026,
  • Updated 4:38 PM IST
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छत्तीसगढ़ के भिलाई से जन आस्था और सांस्कृतिक भव्यता का एक ऐसा अनोखा और हैरान कर देने वाला रंग सामने आया है, जिसकी गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है. 

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इस्पात नगरी भिलाई नगर के सेक्टर-5 स्थित प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय तमिलनाडु के गणेश मंदिर में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का भव्य 'कल्याणम' (विवाह) महोत्सव आयोजित किया गया. इसके बाद बप्पा की एक बेहद चमत्कारी बारात निकाली गई.
 

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ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और दक्षिण भारतीय रीति-रिवाजों से सजी इस बारात की सबसे बड़ी खासियत यहां उमड़ा सैकड़ों कुंवारे युवक-युवतियों का सैलाब रहा. लोक-मान्यता है कि जिन युवक-युवतियों की शादी में लगातार अड़चनें आ रही हैं या विवाह के योग नहीं बन रहे, वे अगर इस पावन बारात में शामिल होकर सच्चे मन से बप्पा की पालकी के दर्शन कर लें, तो उनका विवाह जल्द से जल्द संपन्न हो जाता है.
 

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इसे आस्था का महासंगम कहें या चमत्कारी वरदान, भिलाई की सड़कों पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला. दूर-दूर से पहुंचे अविवाहित श्रद्धालु इस अनोखी शादी की सौगात का हिस्सा बनने के लिए बेताब दिखे. यहां साक्षात भगवान गणेश दूल्हे के रूप में सजकर नगर भ्रमण पर निकले.
 

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मंदिर समिति और स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह परंपरा दशकों पुरानी है और बप्पा के इस कल्याणकारी रूप ने अब तक हजारों परिवारों की सूनी शहनाइयों को गूंजने का मौका दिया है. अंधविश्वास और विश्वास की बहस से परे, भिलाई का यह सिद्धिविनायक मंदिर आज उम्मीद और भक्ति का वो केंद्र बन चुका है, जहां बप्पा न सिर्फ विघ्न हर रहे हैं, बल्कि भक्तों के जीवन की नई शुरुआत का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं.
 

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गणेश भगवान के विवाह को देखने पहुंचीं गणेश भक्त भिलाई की उमा पांडे ने बताया कि वह यह आयोजन देखती आ रही हैं. मंदिर में दस दिन का आयोजन होता है और आज गणेश भगवान का विवाह है. यह साल में एक बार होता है और गणेश पक्ष के सातवें दिन विवाह होता है. विवाह में कोई भी भाग ले सकता है.

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उमा पांडे ने बताया कि बारात निकाली गई. मंगलसूत्र, लाई, हवन और जयमाला का आदान-प्रदान किया गया. भगवान को उनकी पत्नी से मिलाया गया. मान्यता है कि भगवान गणेश से रिद्धि को मिलने से सिद्धि अपने आप प्राप्त होती है. गणेश पूजा में मामा-मामी के घर जाकर निमंत्रण देना और उनके सामने विवाह करना भी परंपरा का हिस्सा है. मान्यता है कि इससे सभी की मनोकामना पूर्ण होती है.
 

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श्री गणेश मंदिर सेक्टर-05 भिलाई नगर, छत्तीसगढ़ के सचिव एस. स्वामी नाथन ने बताया कि यह आयोजन साल में एक बार गणेश पक्ष में होता है. मंदिर बनाने में सात साल लगे. उन्होंने कहा कि यह जीव आत्मा और परमात्मा के मिलने का एक छोटा कार्यक्रम है. जीव आत्मा हम हैं और जिस तरह हम शादी करते हैं, उसी रूप में परमात्मा को लाया गया है.
 

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एस. स्वामी नाथन ने बताया कि यह शादी दक्षिण भारतीय तरीके से हुई है. उन्होंने कहा कि गणेश भगवान को ब्रह्मचारी कहा जाता है, लेकिन सिद्धि और रिद्धि उनकी पत्नी हैं. गणेश पक्ष के सातवें दिन यह आयोजन होता है. मान्यता है कि जिसकी शादी नहीं होती, उसकी शादी हो जाती है. भगवान की बारात निकाली गई और उन्हें मंगलसूत्र पहनाया गया.
 

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मंदिर में काल सर्प दोष निवारण और विशेष अनुष्ठान भी कराए जाते हैं. गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य सजावट की जाती है. इस दौरान यहां तमिलनाडु जैसी सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है.
 

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आयोजन के दौरान गणेश मंदिर का बोर्ड, मंदिर और परिसर में बने अलग-अलग स्वरूपों के गणेश, विवाह के लिए सजे गणेश भगवान, रिद्धि-सिद्धि को सोने का हार पहनाते हुए, स्थानीय महिला का विवाह में शामिल होना, पूजा की रस्में, भगवान गणेश और रिद्धि-सिद्धि की मूर्तियां, हवन करते श्रद्धालु, पंडित जी द्वारा अभिषेक, विवाह की पूजा और आरती के दृश्य देखने को मिले. मंदिर के अंदर तमिल भाषी महिलाएं तमिल बाजा बजाती नजर आईं.

भगवान बालाजी के घर आदेश लेने जाने, पालकी में भगवान रिद्धि-सिद्धि, गणेश भगवान पक्ष के भक्तों द्वारा बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना, बालाजी की तस्वीर, बाजे के साथ गणेश भगवान की बारात, पालकी में बैठे गणेश भगवान, बारात में शामिल स्थानीय महिलाएं, विवाह मंडप में पहुंचते श्रद्धालु, झूमते भक्त, महिलाओं के नृत्य, ऊपर से लिए गए विजुअल, वरमाला पकड़े पंडित जी और विवाह के बाद मंदिर का चक्कर लगाने के दृश्य भी शामिल रहे.
 

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