मां दुर्गा के भव्य मंदिर
शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर से होने जा रहा है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान देश के अलग-अलग कोनों में फैले हुए मां के प्रसिद्ध मंदिरों में भारी संख्या में भक्तों का जमावाड़ा लगता है. आज हम आपको मां दुर्गा के 10 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बता रहे हैं.
वैष्णो देवी मंदिर
वैष्णो देवी मंदिर देश के प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है. यह मंदिर जम्मू और कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में कटरा नगर के समीप की पहाड़ियों पर स्थित है. इन पहाड़ियों को त्रिकुटा पहाड़ी कहते हैं. इन पहाड़ियों पर लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर स्थित है. एक गुफा में माता वैष्णो देवी की स्वयंभू तीन मूर्तियां हैं. देवी काली (दाएं), सरस्वती (बाएं) और लक्ष्मी (मध्य), पिंडी के रूप में गुफा में विराजित हैं. इन तीनों पिंडियों के सम्मिलित रूप को वैष्णो देवी माता कहा जाता है. नवरात्रि में वैष्णो देवी मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग जाता है.
मां विंध्यवासिनी मंदिर
वैसे तो मां विंध्यवासिनी मंदिर में सालों भर भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन नवरात्रि में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है. विंध्याचल मंदिर यूपी के मिर्जापुर जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू शक्तिपीठ है. यहां पर विराजमान मां विंध्यवासिनी मां दुर्गा का स्वरूप हैं.
नैना देवी मंदिर
उत्तर प्रदेश के नैनीताल में नैनी झील के उत्तरी किनारे पर नैना देवी मंदिर स्थित है. आपको मालूम हो कि 1880 में भूस्खलन से यह मंदिर नष्ट हो गया था. बाद में इसे दोबारा बनाया गया. यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है. मंदिर में दो नेत्र हैं जो नैना देवी को दर्शाते हैं.
ज्वाला देवी मंदिर
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच ज्वाला देवी का मंदिर है. मां ज्वाला देवी तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है. शक्तिपीठ वह स्थान कहलाते हैं जहां-जहां भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे. शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती की जिह्वा गिरी थी.
कामाख्या शक्तिपीठ
कामाख्या शक्तिपीठ असम के गुवाहाटी स्थित नीलांचल पर्वत पर है. माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा जाता है. यहां पर माता सती का गुह्वा मतलब योनि भाग गिरा था, उसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई. यहां देवी का योनि भाग होने की वजह से यहां माता रजस्वला होती हैं.
करणी माता मंदिर
राजस्थान में करणी माता मंदिर स्थित है. यह बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गांव देशनोक की सीमा में स्थित है. यह है मां करणी देवी का विख्यात मंदिर. इस मंदिर को चूहे वाले मंदिर के नाम से भी देश और दुनिया के लोग जानते हैं.
दक्षिणेश्वर काली मंदिर
कोलकाता का मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. इसका निर्माण सन 1847 में शुरू हुआ था. कहते हैं जान बाजार की महारानी रासमणि ने स्वप्न देखा था, जिसके अनुसार मां काली ने उन्हें निर्देश दिया कि मंदिर का निर्माण किया जाए. उसके बाद इस भव्य मंदिर में मां की मूर्ति श्रद्धापूर्वक स्थापित की गई. 1855 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ. यह मंदिर 25 एकड़ क्षेत्र में स्थित है.
अम्बाजी मंदिर
अम्बाजी मंदिर गुजरात-राजस्थान सीमा पर स्थित है. यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है. इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है. श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है. मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है. शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं. मां अम्बा-भवानी के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति मां के भक्तों में अपार श्रद्धा है. मंदिर के गर्भगृह में मां की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है. यहां मां का एक श्री-यंत्र स्थापित है. इस श्री-यंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अम्बे यहां साक्षात विराजी हैं. नवरात्र में यहां का पूरा वातावरण भक्तिमय रहता है.
दुर्गा मंदिर, वाराणसी
वाराणसी स्थित दुर्गा मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं. इस मंदिर का निर्माण एक बंगाली महारानी ने 18वीं सदी में करवाया था. यह मंदिर, भारतीय वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली की नागारा शैली में बनी हुई है. इस मंदिर में एक वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है जो दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है. यह इमारत लाल रंग से रंगी हुई है जिसमें गेरू रंग का अर्क भी है. मंदिर में देवी के वस्त्र भी गेरू रंग के है. एक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को मनुष्यों द्वारा नहीं बनाया गया है बल्कि यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी, जो लोगों की बुरी ताकतों से रक्षा करने आई थी.
श्री महालक्ष्मी मंदिर
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर देश के शक्ति पीठों में से एक है. ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है मां के आशीर्वाद से वह मुराद पूरी हो जाती है. भगवान विष्णु की पत्नी होने के नाते इस मंदिर का नाम माता महालक्ष्मी पड़ा.