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Nirjala Ekadashi Vrat 2026: इस साल किस दिन रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत? जानें तिथि, पारण का समय से लेकर भगवान विष्णु की पूजा की विधि तक 

Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी सबसे बड़ी एकादशी है. सिर्फ एक निर्जला एकादशी का व्रत रखने से 24 एकादशियों के बराबर व्रती को पुण्य प्राप्त होता है. इस साल निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा. इसे लेकर व्रतियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. आइए जानते हैं कि निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा. निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. 

Nirjala Ekadashi 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:05 AM IST

Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होता है. एक साल में 24 एकादशी पड़ती है. इसमें निर्जला एकादशी सबसे उत्तम मानी जाती है. निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सिर्फ एक निर्जला एकादशी का व्रत रखने से 24 एकादशियों के बराबर व्रती को पुण्य प्राप्त होता है. हर एकादशी की तरह निर्जला एकादशी के दिन भी भगवान भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है. निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस साल निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा. इसे लेकर व्रतियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. आइए जानते हैं कि निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा. 

साल 2026 में कब है निर्जला एकादशी? 
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 24 जून को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगा और इस तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून दिन गुरुवार को रखा जाएगा. निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच करना शुभ रहेगा.

क्या है निर्जला एकादशी का महत्व?
निर्जला एकादशी के दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना की जाती है. सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत करने से साल की सभी एकादशी का फल मिल जाता है. निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सारे पाप धूल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसा कहा जाता है कि व्यासजी के कहने पर भीम ने निर्जला एकादशी का व्रत रखा था. इसी के चलते इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. भीम ने इस एकादशी का व्रत मोक्ष की प्राप्ति के लिए रखा था. इस दिन दान-पुण्य करना विशेष शुभ माना जाता है. ऐसा करने से धन की कमी नहीं होती है.

निर्जला एकादशी पूजा विधि
1. निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करना चाहिए. 
2. निर्जला एकादशी के दिन सुबह स्नान करके सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें.
3. इसके बाद पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें.
4. व्रत का संकल्प लेने के बाद अगले दिन सूर्योदय होने तक जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें.
5. निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें.
6. निर्जला एकादशी के दिन विष्णु भगवान को पीले फल और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं.
7. निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंजीरी का भोग जरूर लगाएं.
8. निर्जला एकादशी के दिन ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें. रात को दीपदान जरूर करें.
9. निर्जला एकादशी के अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान ध्यान करने के बाद जरूरतमंदों को दान दें.
10. निर्जला एकादशी पर जल से भरा कलश, छाता, वस्त्र और फल का दान करना पुण्यकारी माना जाता है. 
11. निर्जला एकादशी के अगले दिन ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद पारण करें और सभी को प्रसाद खिलाएं.

 

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