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Ayodhya: रामनगरी अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा में उमड़े लाखों श्रद्धालु, पंच कोसी परिक्रमा की भी जोरदार तैयारी

रामनगरी अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा में 30 लाख श्रद्धालु शामिल हुए. ये परिक्रमा 20 नवंबर को रात 2 बजकर 9 मिनट पर शुरू हुई थी और 21 नवंबर को रात 11 बजकर 38 मिनट पर खत्म हुई. 22 नवंबर को रात 9 बजकर 25 मिनट पर पंच कोसी परिक्रमा की शुरुआत होगी.

14 kosi Parikrama
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

दुनिया में फेमस अयोध्या की 14 कोसी परिक्रमा में लाखों श्रद्धालुओं ने शिरकत की. 42 किलोमीटर की परिक्रमा 20 नवंबर को रात 2 बजकर 9 मिनट पर शुरू हुई थी. जबकि 21 नवंबर को रात 11 बजकर 38 मिनट पर समाप्त हुई. अनुमान है कि इस दौरान 30 लाख श्रद्धालुओं ने परिक्रमा की. परिक्रमा का समय खत्म होने के बाद भी भक्त परिक्रमा पथ पर मौजूद रहे. इस दौरान प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा.

हनुमानगढ़ी मंदिर से परिक्रमा की शुरुआत-
परिक्रमा की शुरुआत नाका मुजफरा के हनुमानगढ़ी मंदिर से हुई, जहां मंदिर की मिट्टी को माथे से लगाकर श्रद्धालुओं ने परिक्रमा शुरू की. परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं को उल्लास देखते ही बन रहा था. श्रद्धालुओं ने रामनाम संकीर्तन और लोक गीतों के साथ परिक्रमा की. 
चौदह कोसी परिक्रमा के बारे में मान्यता है कि हिंदू धर्म के अनुसार 14 लोक माने गए हैं. राम की जन्मभूमि पर चौदह कोस की परिक्रमा करने से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम-
सुरक्षा के लिए प्रशासन ने ड्रोन कैमरे की भी व्यवस्था की थी. ड्रोन की मदद से परिक्रमा की निगरानी की जा रही थी. जगह-जगह सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी. पूरे परिक्रमा पथ पर लाइट की समुचित व्यवस्था की गई थी. संगठन की तरफ से परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं के लिए चाय-नाश्ते की भई व्यवस्था की गई थी.

पंच कोसी परिक्रमा-
रामनगरी अयोध्या में पंच कोसी परिक्रमा की शुरुआत आज यानी 22 नवंबर को रात 9 बजकर 25 मिनट पर होगी. यह परिक्रमा 23 नवंबर की शाम 7 बजकर 21 मिनट पर खत्म होगी. पंच कोसी परिक्रमा 15 किलोमीटर के दायरे में होगी. पंच कोसी परिक्रमा के रास्ते पर साफ-सफाई, लाइट की व्यवस्था, बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए भी इंतजाम किए गए हैं. पंच कोसी परिक्रमा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो.

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