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नवरात्रि में इन 7 मंदिरों के जरूर करें दर्शन... कहीं देवी ने किया राक्षस का वध, कहीं ज्वाला खुद निकलती है बाहर

नवरात्रि के इन दिनों में देश के बड़े देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. इन मंदिरों की आस्था जितनी खास है, उनसे जुड़ी कहानियां भी उतनी ही दिलचस्प हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही 7 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में.

Mata Vaishno Devi Yatra
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

इस बार शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है और 20 अक्टूबर को देश के ज्यादातर हिस्सों में दशहरा मनाया जाएगा. वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा 16 से 21 अक्टूबर तक चलेगी. नवरात्रि के इन दिनों में देश के बड़े देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. इन मंदिरों की आस्था जितनी खास है, उनसे जुड़ी कहानियां भी उतनी ही दिलचस्प हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही 7 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में.

वैष्णो देवी, कटरा
जम्मू के कटरा से करीब 12 किलोमीटर पैदल चढ़ाई के बाद माता वैष्णो देवी का भवन आता है. यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, जिसके बाद RFID यात्रा कार्ड मिलता है.

माता वैष्णो देवी से जुड़ी लोककथा के अनुसार वैष्णवी भगवान विष्णु की भक्त थीं. भैरवनाथ नाम का एक तांत्रिक उनके पीछे पड़ गया और उनका पीछा करते हुए त्रिकुटा की पहाड़ियों तक पहुंच गया. देवी ने उससे बचने के लिए पहाड़ों की ओर यात्रा की. आखिर में उन्होंने भैरवनाथ का सिर काट दिया. उसका सिर जिस जगह गिरा, उसे आज भैरों घाटी के नाम से जाना जाता है.

ज्वाला जी, कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वालामुखी मंदिर देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है. यहां देवी की कोई पारंपरिक मूर्ति नहीं है. मंदिर में चट्टान से निकलती प्राकृतिक ज्वालाओं की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सती की जीभ इसी स्थान पर गिरी थी.

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी
असम के गुवाहाटी में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है. यहां देवी की पूजा किसी मूर्ति के रूप में नहीं बल्कि योनि के आकार की प्राकृतिक शिला के रूप में की जाती है. इसके पास से पानी की एक प्राकृतिक धारा भी बहती है, जिसके कभी न सूखने की मान्यता है.

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता
रानी रासमणि ने गंगा के किनारे इस मंदिर का निर्माण 1847 से 1855 के बीच कराया था. 31 मई 1855 को मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई. इसी साल रामकृष्ण परमहंस भी यहां पहुंचे और आगे चलकर मंदिर से उनका गहरा संबंध जुड़ा.

कालिका माता मंदिर, पावागढ़
गुजरात की करीब 800 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर नवरात्रि में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. लोककथाओं में देवी के गरबा नृत्य और पावागढ़ के अंतिम शासक से जुड़ी कहानी सुनाई जाती है. पावागढ़ का ऐतिहासिक क्षेत्र 2004 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ.

चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर

कर्नाटक का मैसूर दशहरा देश के सबसे प्रसिद्ध दशहरा उत्सवों में से एक है. इस साल मैसूर का राज्य उत्सव 11 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक चलेगा. विजयादशमी के दिन चामुंडेश्वरी देवी की प्रतिमा को विशेष जुलूस के साथ शहर में ले जाया जाता है. इस जुलूस की सबसे खास बात करीब 750 किलो का सोने का हौदा है. इसे हाथी पर रखा जाता है और देवी की प्रतिमा इसमें विराजमान होती है. हजारों लोग इस भव्य जुलूस को देखने पहुंचते हैं.
 

मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरै
मदुरै के इस मंदिर में देवी मीनाक्षी मुख्य आराध्य हैं. मान्यता है कि उनका जन्म तीन स्तनों के साथ हुआ था और भविष्यवाणी थी कि अपने पति से मिलते ही तीसरा स्तन गायब हो जाएगा. कथा के अनुसार शिव से मुलाकात होते ही ऐसा हुआ. 

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