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गणपति पंडाल बना जागरूकता की पाठशाला, मराठी स्कूल बचाने से लेकर बेटी और पर्यावरण बचाने तक दिया खास संदेश

पंडाल में तैयार किए गए पारंपरिक मराठी स्कूल के जरिए लोगों से मराठी भाषा और मराठी माध्यम की शालाओं को बचाने की अपील की जा रही है.

Amravati Ganesh Pandal
धनंजय साबले
  • अमरावती ,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

अमरावती के गोरक्षण परिसर में एकवीरा गणेश उत्सव मंडल ने इस बार छोटी और पर्यावरणपूरक गणेश प्रतिमा स्थापित करने के साथ सामाजिक संदेश देने की अनोखी पहल की है. पंडाल में तैयार किए गए पारंपरिक मराठी स्कूल के जरिए लोगों से मराठी भाषा और मराठी माध्यम की शालाओं को बचाने की अपील की जा रही है.

पंडाल में 'मराठी शाला बचाओ' अभियान को केंद्र में रखा गया है. यहां 'क्रांतिज्योती विद्यालय- मराठी माध्यम' नाम से एक स्कूल का पूरा दृश्य तैयार किया गया है. कक्षा का प्रतिरूप बनाकर उसमें बच्चों को मराठी भाषा में पढ़ते हुए दिखाया गया है. इसके जरिए श्रद्धालुओं को मातृभाषा में शिक्षा के महत्व का संदेश दिया जा रहा है.

मंडल का कहना है कि महाराष्ट्र में मराठी माध्यम की शालाओं की संख्या कम हो रही है और कई अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना पसंद कर रहे हैं. ऐसे में मराठी भाषा और मातृभाषा की शिक्षा को लेकर जागरूकता जरूरी है. पंडाल के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि मातृभाषा मजबूत होने से दूसरी भाषाएं सीखने में भी मदद मिलती है.

पर्यावरण और बेटी बचाने का भी संदेश
इस पंडाल में सिर्फ भाषा और शिक्षा ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर भी लोगों का ध्यान खींचा गया है. श्रद्धालुओं से पर्यावरण की रक्षा करने और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की जा रही है. इस स्कूल का दृश्य तैयार करने वाले भूषण मावलीकर ने कहा कि मराठी भाषा और मराठी स्कूलों को बचाना जरूरी है. गणपति बप्पा के चरणों में यही प्रार्थना है कि समाज अपनी मातृभाषा और शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को मजबूत बनाए.

इस तरह छोटी और पर्यावरणपूरक गणेश प्रतिमा के साथ तैयार किया गया यह पंडाल धार्मिक उत्सव को भाषा, शिक्षा, पर्यावरण और बेटी बचाने जैसे सामाजिक मुद्दों से जोड़ रहा है.
 

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