गणेश उत्सव में डेढ़ महीने का वक्त, अभी से तैयार हो रही स्पेशल इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं

साल 2026 में गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा और समापन 23 सितंबर को होगा. इसके लिए तैयारी अभी से शुरू हो गया है. महाराष्ट्र के अमरावती में घरों में स्थापित करने के लिए इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं.

Amrawati News
धनंजय साबले
  • अमरावती,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:38 PM IST

गणेशोत्सव का त्योहार भी जल्द ही आने वाला है. ऐसे में बाप्पा के स्वागत की तैयारियां भी पूरे जोर शोर से शुरू हो गई है. गणेश उत्सव को लेकर बाजारों में भी रौनक दिखने लगी है. बप्पा के स्वागत की तैयारी तेज अमरावती की एक कार्यशाला में कलाकार दिन-रात मेहनत कर इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं. खास बात ये है कि इन प्रतिमाओं की मांग सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश और विदेश तक फैली है.

इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं हो रही तैयार-
अमरावती की इस कार्यशाला में गणपति की मूर्तियों को आकार देने की साधना चल रही है. रंग बिरंगी बाप्पा की प्रतिमाएं, अलग-अलग आकार के आसन पर विराजे गणपति, कहीं बारीक नक्काशी का काम चल रहा है तो कोई रंगों से बाप्पा की दिव्यता को निखार रहा है. जहां हर हाथ में कला है और हर चेहरे पर आस्था की चमक है.

घरों में स्थापना के लिए खास तौर पर बनाई जाती हैं प्रतिमाएं-
गणेश चतुर्थी में भले ही अभी वक्त है. लेकिन अमरावती की जिराफे आर्ट कार्यशाला में इस बार भी आस्था के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा रहा है. इसीलिए यहां खास इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की जा रही हैं. छोटी और आकर्षक ये प्रतिमाएं खास तौर पर घरों में स्थापना के लिए बनाई जा रही हैं.

देश-विदेश में है मूर्तियों की डिमांड-
हर प्रतिमा में बारीक नक्काशी और आकर्षक रंग कलाकारों की सालों की मेहनत और श्रद्धा की कहानी बयां कर रही है. अमरावती की कार्यशाला आस्था, कला और पर्यावरण संरक्षण का ऐसा संगम बन गई है कि यहां होने वाली इन प्रतिमाओं की मांग सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों और विदेशों तक भी पहुंच चुकी है.

गणेशोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्सव भी है. इसीलिए तो हर प्रतिमा में कलाकार सिर्फ मिट्टी नहीं गढ़ते, बल्कि उसमें अपनी भक्ति, मेहनत और भावनाएं भी उकेर देते हैं, ताकि जब बप्पा घर-घर विराजें तो उनके साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प भी हर घर तक पहुंचे. अब बस बाप्पा के भक्तों को इंतजार 14 सितंबर का है. जब गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाएगा.

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