अष्टविनायक गणपति में सबसे समृद्ध गणपति के रूप में पहचान रखने वाले ओझर के श्री विघ्नहर गणपति का बेहद अलौकिक और राजेशाही रूप भक्तों के सामने आया है. गणपति बप्पा के पांच दिवसीय जन्मोत्सव के अवसर पर सोमवार रात करीब 11 बजे के बाद विघ्नहर बप्पा को पेशवाकालीन पोशाक पहनाई गई. इसके साथ ही करीब 200 साल पुराने और करोड़ों रुपये मूल्य के ऐतिहासिक आभूषणों से बप्पा का भव्य श्रृंगार किया गया.
ऐतिहासिक आभूषणों से हुआ भव्य श्रृंगार
पेशवाकालीन पोशाक में सजे विघ्नहर बप्पा का स्वरूप देखते ही बन रहा था. करीब 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक आभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया, जिसकी वजह से बप्पा का यह रूप और भी खास नजर आया. बप्पा की आंखों में माणिक रत्न जड़े हुए हैं. माथे पर हीरा और चंद्रकोर सुशोभित है. गले में चंद्रहार और स्वस्तिक हार है, जबकि सिर पर छत्र सजाया गया है. इसके अलावा कंठीहार, शिवगंध और कमर में करदोरा जैसे पारंपरिक आभूषण भी बप्पा के श्रृंगार का हिस्सा रहे. इन सभी आभूषणों से सजा विघ्नहर बप्पा का शाही रूप भक्तों के लिए बेहद आकर्षक रहा.
साल में सिर्फ दो बार दिखता है ‘सुवर्ण’ रूप
विघ्नहर बप्पा के इस श्रृंगार की सबसे खास बात यह है कि आभूषणों से सजा उनका यह अद्भुत रूप भक्तों को साल में सिर्फ दो बार ही देखने को मिलता है. यह विशेष रूप भाद्रपद शुद्ध चतुर्थी और माघ शुद्ध चतुर्थी के अवसर पर भक्तों के सामने आता है. यही वजह है कि बप्पा के इस 'सुवर्ण' रूप का दर्शन भक्तों के लिए किसी पर्वणी से कम नहीं माना जाता. बप्पा को पारंपरिक पेशवाकालीन पोशाक और ऐतिहासिक आभूषणों से सजाए जाने के बाद मंदिर में उनका रूप बेहद राजेशाही नजर आता है. बप्पा के इस खास स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों में भी विशेष उत्साह देखने को मिलता है. अष्टविनायक के विघ्नहर गणपति का यह श्रृंगार उनकी पारंपरिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत की झलक भी दिखाता है.
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