Advertisement

अयोध्या बनेगा ज्ञान केंद्र... ‘ज्ञान भारतम्’ से प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण, विरासत खोजने निकली टीमें

धार्मिक नगरी अयोध्या अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का वैश्विक केंद्र बनने की ओर बढ़ रही है. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम्’ परियोजना के तहत अब उन प्राचीन पांडुलिपियों को खोजकर डिजिटल रूप दिया जाएगा, जिनमें भारत की सांस्कृतिक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक विरासत समाहित है.

Ram Mandir Ayodhya
gnttv.com
  • अयोध्या,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

धार्मिक नगरी अयोध्या अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का वैश्विक केंद्र बनने की ओर बढ़ रही है. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम्’ परियोजना के तहत अब उन प्राचीन पांडुलिपियों को खोजकर डिजिटल रूप दिया जाएगा, जिनमें भारत की सांस्कृतिक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक विरासत समाहित है.

जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने इस ऐतिहासिक पहल की जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देशभर में बिखरे पारंपरिक ज्ञान विशेषकर हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर सुरक्षित करना और उन्हें डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाना है.

हर गांव और शहरी वार्ड स्तर तक अभियान
उन्होंने कहा कि इसके लिए अयोध्या जनपद में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो मंदिरों मठों आश्रमों गुरुकुलों और संग्रहालयों में जाकर ऐसी दुर्लभ पांडुलिपियों की तलाश कर रही हैं. यही नहीं हर गांव और शहरी वार्ड स्तर तक अभियान चलाकर लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे अपने पास मौजूद पुराने दस्तावेजों और हस्तलिखित ग्रंथों की जानकारी साझा करें. इस अभियान में तकनीक की भी बड़ी भूमिका है. भारत सरकार द्वारा एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिसके जरिए पांडुलिपियों की तस्वीरें और लोकेशन अपलोड की जाएंगी. इसके बाद विशेषज्ञ एजेंसियां इन दस्तावेजों का परीक्षण करेंगी और प्रमाणिक पाए जाने पर उन्हें स्कैन कर डिजिटल संग्रह में शामिल किया जाएगा.

50 से 75 वर्ष पुराने दस्तावेजों की होगी जांच
प्रशासन के अनुसार, कम से कम 50 से 75 वर्ष पुराने ऐसे दस्तावेज, जिनमें भारतीय संस्कृति, वेद, उपनिषद, ऐतिहासिक घटनाएं या पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी सामग्री हो, उन्हें इस परियोजना के तहत प्राथमिकता दी जाएगी.  कई बार आम लोग यह पहचान नहीं पाते कि उनके पास मौजूद दस्तावेज कितने महत्वपूर्ण हैं, इसलिए विशेषज्ञों की मदद से उनकी जांच कराई जाएगी. यह पहल न केवल भारत की खोई हुई ज्ञान धरोहर को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी माध्यम बनेगी. अयोध्या से शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे देश में ज्ञान की नई रोशनी फैलाने का संकेत दे रहा है. 

रिपोर्टर: मयंक शुक्ला

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement