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बद्रीनाथ से 52 KM दूर चीन सीमा के पास बसा है यह दिव्य देवस्थान, मान्यता है कि खुद भगवान कृष्ण ने यहां किया था स्नान, लगी श्रद्धालुओं की भीड़

अगर आप बद्रीनाथ के दर्शन का प्लान बना रहे हैं तो आपको उनके मंदिर से 52 किलोमीटर दूर देवताल के दर्शन के लिए भी जरूर जाना चाहिए. धार्मिक नजरिये से ये स्थान महत्वपूर्ण तो है ही, साथ ही यहां की खूबसूरती पर्यटन के लिहाज से भी देखते बनती है. हर तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और ग्लेसियर यहां की सुंदरता में अनोखे रंग बिखेर रहे हैं.

देवताल के खूबसूरत पहाड़
gnttv.com
  • चमोली,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:35 PM IST

उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से करीब 52 किलोमीटर दूर और भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित पवित्र देवताल इन दिनों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों से गुलजार दिखाई दे रहा है. समुद्र तल से लगभग 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दिव्य स्थल अभी भी मोटी बर्फ की चादर से ढका हुआ है और पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है. चारों ओर फैले ग्लेशियर, बर्फ से जमे सरोवर और हिमालय की विशाल चोटियां यहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. हालांकि आस्था के नजरिये से देखें तो भी ये जगह एक प्रमुख तीर्थ स्थल है.

सनातन परंपरा में खास महत्व रखता है देवताल
धार्मिक नजरिये से देवताल को बेहद पवित्र माना जाता है. देवताल का मतलब होता है 'देवों की ताल', इसलिए इसे 'देवताओं की ताल' के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां स्नान करने का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण भी इस पवित्र ताल में स्नान करने आए थे. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस स्थान के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

बद्रीनाथ यात्रा के बाद खुला रास्ता, बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
इस वर्ष बद्रीनाथ धाम यात्रा शुरू होने के बाद देवताल का मार्ग भी पूरी तरह खुल गया है. अब विशेष अनुमति और इनर लाइन परमिट के जरिए श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक यहां तक पहुंच पा रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार द्वारा इनर लाइन परमिट की प्रक्रिया को आसान बनाए जाने के बाद इस क्षेत्र में आने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है.

बर्फ से जमी झील और ग्लेशियर का नजारा देखते बनता है
हालांकि जून का महीना चल रहा है, लेकिन ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में अभी भी भारी बर्फबारी के निशान साफ दिखाई देते हैं. देवताल का पूरा सरोवर मोटी बर्फ से ढका हुआ नजर आ रहा है. रास्ते में जगह-जगह ग्लेशियर दिखाई देते हैं, जबकि चारों तरफ सफेद बर्फ की परत इस जगह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है. यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है.

'यहां का अनुभव शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता'
शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक देवताल का दृश्य अत्यंत रमणीक और अलौकिक है. उन्होंने बताया कि रास्ते भर ग्लेशियर और बर्फ दिखाई देती है तथा बद्रीनाथ के समीप स्थित यह ताल श्रद्धालुओं को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव कराता है. उनका कहना है कि यहां आने वाले लोगों को इस पवित्र स्थल का जल भी अपने साथ जरूर ले जाना चाहिए.

आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम
देवताल सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम है. चीन सीमा के करीब स्थित यह दिव्य स्थान उन दुर्लभ जगहों में शामिल है, जहां पहुंचकर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ हिमालय की अद्भुत सुंदरता का भी अनुभव होता है. यही वजह है कि हर साल यहां आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है.

(इनपुट- कमलनयन सिलोड़ी)

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