मध्य प्रदेश के बैतूल में एक अनोखे धार्मिक आयोजन का चर्चा हो रही है. प्रखरश्री दीदी के माता-पिता ने सपना देखा था कि उनकी बेटी जज बने. जबकि बेटी के मन में वैराग्य का भाव था. बेटी ने पहले जज की परीक्षा पास की और माता-पिता का सपना सच किया. उसके बाद संन्यासी बन गई. बैतूल की सड़कों पर रविवार को आस्था, उत्साह और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला. जैनेश्वरी दीक्षा की ओर अग्रसर नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी सहित 5 दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया. जगह-जगह पांचों दीक्षार्थी बहनों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया. फैमिली ने प्रखरश्री दीदी को भावुक विदाई दी.
जज बनकर पैरेंट्स का सपना पूरा किया-
बैतूल की बेटी प्रखर ने अपने माता-पिता के सपने को साकार करने के लिए पहले जज का एग्जाम क्वालीफाई किया और जॉइनिंग के पहले अपने ब्रह्मचर्य मार्ग पर निकल पड़ी. परिवार और समाज ने प्रखरश्री दीदी को भावुक विदाई दी. साध्वी की दीक्षा लेने के पहले फिर घर के परिवार में उन्हें बैतूल में ऐतिहासिक विदाई दी.
विंटेज कार, बग्घियों के साथ विदाई-
शहर की सड़कों पर विंटेज कारों का काफिला और उदयपुर की बैंड पार्टी जब निकली तो हर जुबान पर बैतूल की बेटी के त्याग की चर्चा थी. प्रखरश्री दीदी के साथ चार और दीदी भी साध्वी बनी हैं और 22 नबंवर को दीक्षा लेंगी. उसके पहले परिजनों ने उनको विदाई दी है.
बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में विंटेज कारें, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आए बैंड की शानदार प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही.
जगह-जगह फूल-मालाओं से भव्य स्वागत-
जगह-जगह पुष्पमालाओं और जयकारों के साथ पांचों दीक्षार्थी बहनों का आत्मीय स्वागत किया गया. भक्ति और उल्लास के वातावरण में बड़ी संख्या में समाजजन और दूर-दराज से आए श्रद्धालु शामिल हुए.
चल समारोह जैन दादावाड़ी पहुंचकर संपन्न हुआ, जहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई. सांसारिक सुखों से विरक्ति और संयम के मार्ग पर बढ़ते इन कदमों का बैतूल के जैन समाज ने भव्य अभिनंदन किया.
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