पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान के कालना का हटगाछा गांव के एक कलाकार तापस पाल की बनाई मूर्ति इंग्लैंड भेजी जा रही है. यह कलाकार अपनी मूर्तियों के अनोखे अंदाज से हमेशा लोगों का ध्यान खींचता है. पिछले साल सरस्वती, दुर्गा और गणेश की अपनी मूर्तियों से उन्होंने खूब चर्चा बटोरी थी. इस साल उन्हें 20 मूर्तियों के ऑर्डर मिले हैं. तापस पाल पारंपरिक शैली से लेकर नए और अनोखे कॉन्सेप्ट वाली मूर्तियाँ बनाते हैं.
24 घंटे चल रहा काम- कलाकार
कोलकाता के एक व्यक्ति को सोशल मीडिया पर कलाकार की बनाई एक मूर्ति पसंद आई. इसलिए उन्होंने सीधे कलाकार से संपर्क किया. वे यहाँ से दुर्गा की मूर्ति इंग्लैंड में रहने वाले अपने बेटे के लिए ले जाना चाहते थे.
मूर्तिकार तापस पाल ने कहा कि पारंपरिक शैली में बनी दुर्गा की यह मूर्ति मुख्य रूप से पुआल और मिट्टी से तैयार की गई है. अन्य कामों के साथ-साथ इस मूर्ति को बनाने में सात से आठ दिन लगे और अभी भी कुछ काम बाकी हैं, काम चौबीसों घंटे चल रहा है.
इंग्लैंड भेजी जाएगी मूर्ति-
5 किलोग्राम वजन और 28 इंच ऊंची यह मूर्ति खास पैकेजिंग में इंग्लैंड भेजी जाएगी. यह कलाकार और उनके परिवार के लिए बहुत खुशी की बात है. तापस के पिता बिल्लनाथ पाल एक कुम्हार हैं. उनका कहना है कि उनका बेटा मूर्तियाँ बनाता है और बहुत अच्छी मूर्तियाँ बनाता है. इस बार उनके बेटे की बनाई दुर्गा प्रतिमा विदेश भेजी जा रही है. यह बहुत अच्छा लग रहा है.
पड़ोसी भी हैं खुश-
स्थानीय लोगों का कहना है कि कलाकार को सालों से पहचान मिल रही है और उनकी मूर्तियाँ देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुँचती रही हैं. लेकिन यह पहली बार है, जब कोई प्रतिमा विदेश जा रही है. समुदाय उनकी कारीगरी से बहुत प्रभावित है.
जल्द विदेश भेजी जाएगी मूर्ति-
एक-दो दिनों में, तापस पाल द्वारा बनाई गई दुर्गा प्रतिमा को पूर्व बर्दवान के कलना से इंग्लैंड भेजा जाएगा, जहाँ देवी दुर्गा की पूजा की जाएगी. मूर्ति कलाकार तापस पाल की बनाई दुर्गा प्रतिमा की विदेशों में श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा की जाएगी. तापस और उनके परिवार से पड़ोसी बहुत खुश हैं.
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