Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि का पर्व मार्च माह में मनाया जा रहा है. 20 मार्च 2026 को नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है.
ब्रह्म का अर्थ तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली है. मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. इनकी उपासना से जीवन में मानसिक शांति, चंद्रमा की कमजोर स्थिति का समाधान और साधना में सफलता प्राप्त होती है. ज्योतिष के मुताबिक मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से चंद्रमा की कमजोर स्थिति को सुधारा जा सकता है.
मां ब्रह्मचारिणी का कैसा है रूप?
मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है. जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते हैं, वो जीवन के कठिन समय में भी संघर्ष से विचलित नहीं होते हैं. भक्तों में त्याग, सदाचार, संयम की बढ़ोतरी होती है. मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर वाराणसी के कर्णघंटा क्षेत्र के सप्तसागर मोहल्ले में है.
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए क्या है शुभ मुहूर्त?
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को आप सूर्योदय के बाद अपनी सुविधा अनुसार पूजन कर सकते हैं लेकिन विशेष कार्यों की सिद्धि के लिए इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 से दोपहर 1:10 तक रहेगा. इस शुभ समय में की गई प्रार्थना विशेष फलदायी मानी जाती है.
ब्रह्म मुहूर्त: 05:08 एएम से 05:55 एएम तक
प्रातः सन्ध्या: 05:31 एएम से 06:43 एएम तक
अभिजित मुहूर्त: 12:22 पीएम से 01:10 पीएम तक
गोधूलि मुहूर्त: 06:47 पीएम से 07:11 पीएम तक
सायाह्न सन्ध्या: 06:49 पीएम से 08:01 पीएम तक
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
1. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए.
2. फिर पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए.
3. इसके बाद पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाकर माता रानी की पूजा शुरू करनी चाहिए.
4. पूजा के दौरान मां ब्रह्मचारिणी को सफेद फूल, चंदन, रोली, अक्षत आदि अर्पित करने चाहिए.
5. ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए.
6. फिर माता की कथा का पाठ करना चाहिए.
7. अंत में आरती करके पूजा संपन्न करना चाहिए.
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग
मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और गुड़ का भोग लगाना चाहिए. यह भोग मां को बहुत प्रिय है. आप इन पदार्थों से बने भोज्य पदार्थ भी माता को अर्पित कर सकते हैं. शक्कर का प्रसाद अर्पित करने से परिवार के सभी सदस्यों की उम्र बढ़ती है. विवाह में बाधा आने वाले भक्तों को मां की उपासना करने की सलाह दी जाती है.
मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी ने दक्ष प्रजापति के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था. उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की. मां ब्रह्मचारिणी ने एक हजार साल तक सिर्फ फल-फूल खाकर तपस्या की और 100 साल तक सिर्फ जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया. उन्होंने बारिश, धूप की परवाह किए बिना तपस्या की.
कई सालों तक उन्होंने टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शिव के लिए तपस्या करती रहीं. जब भगवान शिव नहीं मानें तो उन्होंने इन चीजों का भी त्याग कर दिया और बिना भोजन व पानी के अपनी तपस्या को जारी रखा. पत्तों को भी खाना छोड़ देने के कारण उनका एक नाम 'अर्पणा' भी पड़ गया. इस तपस्या से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया. माता की तपस्या को देखकर ब्रह्माजी ने कहा कि देवी, आपकी मनोकामना पूरी होगी. जल्द ही भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हे पति के रूप में प्राप्त होंगे. अब तुम तपस्या से विरत होकर घर लौट जाओ. इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी घर लौट गईं. इसके कुछ दिनों बाद उनका विवाह महादेव शिव के साथ हो गया.