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Char Dham Yatra 2026: श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! 19 अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा, इस बार 11 दिन पहले खुल जाएंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट, जानें कब से कर सकेंगे बद्रीनाथ के दर्शन

Char Dham Yatra:चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है. इस साल पिछले साल की तुलना में 11 दिन पहले यह पवित्र शुरू होगी. 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे. बद्रीनाथ धाम का कपाट 23 अप्रैल को खुलेगा.

Kedarnath and Badrinath Dham (File Photo: PTI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

Kedarnath-Badrinath-Gangotri-Yamunotri: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) को लेकर श्रद्धालुओं में हर साल उत्साह रहता है. इस साल चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है क्योंकि इस साल पिछले साल की तुलना में 11 दिन पहले यह पवित्र शुरू होगी. आपको मालूम हो कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड के चार पवित्र तीर्थों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि चारधाम यात्रा करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.  हिंदू धर्म में हर व्यक्ति को कम से कम एक बार चारधाम यात्रा करने की सलाह दी जाती है.

गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होती है चारधाम यात्रा की शुरुआत  
चारधाम यात्रा की शुरुआत गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होती है. हर साल अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाते हैं. इस साल चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगा. पिछले साल यह यात्रा 30 अप्रैल से शुरू हुई थी. ऐसे में इस साल चारधाम यात्रा पिछले साल की तुलना में 11 दिन पहले शुरू होगी. चारधाम यात्रा का समय बढ़ने से श्रद्धालुओं को दर्शन करने के लिए अधिक समय मिलेगा. 

23 अप्रैल को खुलेगा बद्रीनाथ धाम का कपाट
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा हो गई है. बद्रीनाथ धाम का कपाट 23 अप्रैल 2026 को 6 बजकर 15 मिनट पर खुलेगा. बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है. इसे धरती का वैकुंठ कहा जाता है. बद्रीनाथ धाम नर-नारायण पर्वत के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है. यहां विराजमान भगवान बद्रीविशाल भक्तों को मोक्ष और आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, यहां तप्त कुंड में स्नान से सभी पाप धुलते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है. 

अक्षय तृतीया का महत्व
चारधाम यात्रा के शुभारंभ के लिए अक्षय तृतीया का दिन शुभ माना जाता है. विशेष माना जाता है. हिंदू पंचांग के मुताबिक वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं. अक्षय का अर्थ होता है, जिसका कभी क्षय यानी नाश न हो. शास्त्रों के मुताबिक अक्षय तृतीया के दिन दान, जप और पुण्य कार्य करना काफी फलदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है. कपाट खेलने के लिए अक्षय तृतीया का दिन सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है.

मोबाइल ले जाने पर रोक
चारधाम यात्रा सही से संपन्न हो इसको लेकर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब श्रद्धालु केदरनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन लेकर प्रवेश नहीं कर पाएंगे. मंदिर समिति और जिला प्रशासन मिलकर मोबाइल फोन को सुरक्षित रूप से जमा कराने की विशेष व्यवस्था करेंगे. अधिकारियों ने बताया कि धामों में वीडियो, रील और व्लॉग बनाने को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे थे. इसी कारण बद्रीनाथ धाम में सिंहद्वार से आगे मोबाइल ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है. यही नियम केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी लागू होगा.

 

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