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Chaturmas 2026: 25 जुलाई से शुरू हो रहा चातुर्मास... 4 माह तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य... जानें फिर कब हैं विवाह के शुभ मुहूर्त

इस साल चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू हो रहा है. इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे. चातुर्मास के दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण सहित अन्य मांगलिक कामों पर रोक लग जाती है. ऐसे में आप यहां जान सकते हैं कि विवाह के शुभ मुहूर्त कब मिलेंगे.

Chaturmas 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:45 AM IST

हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है. देवशयनी एकादशी के दिन से ही चातुर्मास की शुरुआत होती है.  चातुर्मास में भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं. चातुर्मास के दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण,  मुंडन संस्कार  सहित अन्य मांगलिक कामों पर रोक लग जाती है. भगवान विष्णु के देवउठनी एकादशी पर जागने के बाद ही दोबारा मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है.  ऐसे में आप यहां जान सकते हैं कि विवाह के शुभ मुहूर्त कब मिलेंगे.

कब से शुरू होगा चातुर्मास
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ होगी और 25 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी. 25 जुलाई 206 को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार इसी दिन देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा और इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाएगा.

इस तारीख से शुरू होंगे विवाह
इस बार चातुर्मास के दौरान 25 जुलाई से कुल 119 दिनों तक भगवान विष्णु विश्राम करेंगे और फिर 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन वह उठेंगे. इसी के साथ चातुर्मास खत्म हो जाएगा. इसके बाद फिर से शादी-विवाह सहित अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे.

नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त

  • 21 नवंबर 2026, शनिवार
  • 24 नवंबर 2026, मंगलवार
  • 25 नवंबर 2026, बुधवार
  • 26 नवंबर 2026, बृहस्पतिवार

दिसंबर 2026 शादि के शुभ मुहूर्त

  • 2 दिसंबर 2026, बुधवार
  • 3 दिसंबर 2026, बृहस्पतिवार
  • 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार
  • 5 दिसंबर 2026, शनिवार
  • 6 दिसंबर 2026, रविवार
  • 11 दिसंबर 2026, शुक्रवार
  • 12 दिसंबर 2026, शनिवार

चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु कहां करते हैं विश्राम 
पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान विष्णु चातुर्मास के 4 माह विश्राम करने के लिए क्षीर सागर को छोड़कर दैत्यराज बलि के पाताल लोक में चले जाते हैं. बलि के महल में प्रभु विश्राम करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विष्णु ने वामन रूप में राजा बलि की दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था और उनके साथ पाताल लोक चले गए थे. फिर माता लक्ष्मी दैत्यराज बलि को मनाकर भगवान को वापस वैकुंठ धाम लाईं थीं.भगवान विष्णु जब मां लक्ष्मी के साथ बैकुंठ धाम वापस जा रहे थे, तो उस समय उन्होंने राजा बलि को वरदान दिया था. उन्होंने कहा था कि वह साल में 4 माह के लिए उनके पाताल लोक में आकर विश्राम करेंगे. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि तभी से भगवान विष्णु 4 माह के लिए संसार का कार्यभार छोड़कर पाताल लोक में जाकर विश्राम करते हैं. भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं.

 

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