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Chitragupta Puja 2026 Samagri List: चित्रगुप्त पूजा में किस-किस सामग्री की होती है जरूरत? नोट करें पूजा का सामान

दिवाली के बाद आने वाली चित्रगुप्त पूजा कायस्थ समाज द्वारा श्रद्धा से मनाई जाती है. इस दिन भगवान चित्रगुप्त के साथ कलम, दवात और बही-खाते की पूजा की जाती है.

भगवान चित्रगुप्त की फोटो
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

कार्तिक महीने में दिवाली के बाद आने वाली चित्रगुप्त पूजा का कायस्थ समाज में खास महत्व है. इस दिन भगवान चित्रगुप्त के वंशज उनकी पूजा करते हैं. पुराणों के हिसाब से भगवान चित्रगुप्त मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. इसलिए इस दिन उनकी आराधना के साथ कलम और दवात की पूजा भी की जाती है. चित्रगुप्त भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र है, जो उसके समस्त काया से उत्पन्न हुए, जिस कारण चित्रगुप्त जी के वंशजों को कायस्थ कहा जाता है. इस दिन लोग नई कलम की भी पूजा करते हैं. अगर आप भी इस बार चित्रगुप्त पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले ही पूजा की सभी चीजें जुटाकर घर पर रख लें.

चित्रगुप्त पूजा के लिए क्या चाहिए-
पूजा के लिए सबसे पहले भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या प्रतिमा रख लें. इसके अलावा पूजा की थाली, चौकी, लाल या पीला कपड़ा, रोली, चंदन, अक्षत यानी साबुत चावल, फूल और फूलों की माला की जरूरत होगी. भगवान को अर्पित करने के लिए फल, मिठाई, पान, सुपारी, जनेऊ और नारियल भी इक्कठा कर लें.

पूजा में दीपक, घी या तेल, रुई की बाती, धूप, अगरबत्ती, कपूर और माचिस भी रखें. इसके साथ ही पूजा के लिए गंगाजल, कलश, आम के पत्ते और प्रसाद की व्यवस्था कर लें. 

कलम, दवात और कागज रखना न भूलें
चित्रगुप्त पूजा की सबसे खास बात है कि इस दिन कलम और दवात की पूजा की जाती है. इसलिए पूजा के लिए नई कलम, दवात और कागज लेना न भूलें. आज के समय में लोग दवात की जगह स्याही की बोतल रखते हैं. कुछ लोग पूजा के दौरान बही-खाता, कॉपी या अपनी पढ़ाई और काम से जुड़ी किताबें भी रखते हैं. मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त की पूजा के साथ लेखनी की आराधना करने से ज्ञान, बुद्धि और काम में सफलता का आशीर्वाद मिलता है. इसी वजह से इस दिन कलम को सम्मान देने की परंपरा निभाई जाती है.

पूजा में इन चीजों का भी रखें ध्यान
भगवान चित्रगुप्त को भोग लगाने के लिए फल, मिठाई और घर में बना सात्विक प्रसाद तैयार कर सकते हैं. कुछ परिवारों में पूजा के दौरान गुड़, बताशे और मौसमी फल चढ़ाने की भी परंपरा है. इसके अलावा पूजा के लिए आसन और हाथ धोने के लिए साफ पानी भी पास में रखें. पूजा शुरू करने से पहले चौकी को साफ करके उस पर कपड़ा बिछाएं. फिर भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और उनके सामने कलम, दवात व कागज रखें. इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप से विधि-विधान के साथ पूजा करें. कायस्थ समाज के लोग इस दिन विशेष रूप से उनकी पूजा करते हैं. इस अवसर पर लोग अपने काम, व्यापार और पढ़ाई का लेखा-जोखा भगवान चित्रगुप्त को सौंपते हैं. यह दिन अपने काम और जिम्मेदारियों के प्रति ईमानदार रहने की सीख भी देता है. इसलिए पूजा के दौरान भगवान से सद्बुद्धि और सही रास्ते पर चलने का आशीर्वाद मांगा जाता है.
 

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