दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत धनतेरस से होती है. इस दिन बाजारों में सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तनों की खूब खरीदारी होती है. कई लोग इस दिन नए बर्तन खरीदकर घर लाते हैं. मान्यता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस दिन बर्तन और धातु की चीजें खरीदने की परंपरा क्यों है?
धनतेरस का क्या है धार्मिक महत्व?
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है. यह त्योहार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे. उन्हें आयुर्वेद और अच्छे स्वास्थ्य का देवता माना जाता है. इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना की जाती है. इसके साथ ही मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है.
धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा क्यों है?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था. इसी धार्मिक मान्यता के कारण धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा शुरू हुई. लोग इस दिन पीतल, तांबे और चांदी के बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं. माना जाता है कि नए बर्तन घर में लाने से सुख और खुशहाली आती है.
सोना-चांदी खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की भी पुरानी परंपरा है. भारतीय संस्कृति में इन धातुओं को धन और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग सोने-चांदी के सिक्के, गहने और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और धन में बढ़ोतरी होती है.
धनतेरस पर क्या खरीद सकते हैं?
इस दिन लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार पीतल, तांबे और चांदी के बर्तन, सोने-चांदी के सिक्के, गहने और पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजें खरीदते हैं. कई परिवार इस दिन नई झाड़ू खरीदने की परंपरा भी निभाते हैं.
खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है, लेकिन इसके लिए महंगी चीजें खरीदना जरूरी नहीं है. आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से छोटी सी चीज भी खरीद सकते हैं. सोना-चांदी लेते समय उसकी शुद्धता और हॉलमार्क जरूर जांचें. त्योहार का असली उद्देश्य परिवार में खुशियां बांटना और अच्छी सेहत व सुख-समृद्धि की कामना करना है.
धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
दीपावली का त्योहार मां लक्ष्मी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है. धनतेरस के दिन भी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इसके अलावा, इस दिन भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की आराधना का भी खास महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है. उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी कहा जाता है. वहीं, भगवान कुबेर को धन और संपत्ति का देवता माना जाता है.
धनतेरस पर क्यों की जाती है पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से अच्छी सेहत और लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है. वहीं, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा घर में सुख-समृद्धि और धन की खुशहाली के लिए की जाती है. इस दिन शाम को यम देव के नाम से दीपक जलाने की भी परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षा मिलती है.
धनतेरस पर पूजा करने का सही तरीका क्या है?
धनतेरस के दिन सबसे पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद घर के उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा की जगह तैयार करें. वहां भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. सभी देवी-देवताओं के सामने दीपक जलाएं और फूल, मिठाई, धूप और फल अर्पित करें. इसके बाद भगवान धन्वंतरि के स्तोत्र और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. इस दिन खरीदी गई नई वस्तु या धातु के सामान को भी पूजा में रखकर उसकी आरती करें. मान्यता है कि इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.