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Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में जरूर करें इन चीजों का प्रयोग, पितरों की शांति के लिए मानी जाती हैं खास... दान-पुण्य करना भी बिल्कुल न भूलें

पितृपक्ष का हिंदू धर्म में काफी महत्व होता है. इस दौरान पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए दान-पुण्य और पूजा की जाती है. ऐसे में पूजा में कुछ विशेष चीज़ों को इस्तेमाल किया जाता है. इस चीज़ों का धार्मिक मान्यता के अनुसार काफी महत्व होता है.

Pitru Paksha 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

पितृपक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का समय माना जाता है. इस दौरान लोग श्राद्ध, तर्पण, दान और पूजा जैसे काम करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में कुछ खास वस्तुओं का प्रयोग शुभ माना जाता है. जल, अग्नि, उड़द की दाल, काले तिल और कुश का श्राद्ध कर्म में विशेष महत्व बताया गया है. साथ ही इस दौरान पशुओं की सेवा करना और जरूरतमंद लोगों को भोजन या अनाज का दान करना भी अच्छा माना जाता है.

पितृपक्ष में जल का है खास महत्व

जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. धार्मिक कार्यों में भी जल का विशेष स्थान है. पितृपक्ष में पितरों को जल अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि अंजुली में जल लेकर पितरों का तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है. पितृपक्ष में सूर्योदय से पहले पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय जल की बर्बादी नहीं करनी चाहिए.

अग्नि का क्या महत्व है?

हिंदू धर्म में अग्नि को बहुत पवित्र माना जाता है. पूजा और हवन में अग्नि का विशेष महत्व है. मान्यता है कि अग्नि में दी गई आहुति देवताओं तक पहुंचती है. श्राद्ध कर्म में भोजन का एक हिस्सा अग्नि को अर्पित करने की परंपरा भी बताई गई है. पितृपक्ष में सुगंधित सामग्री की पांच आहुति अग्नि में देने को भी शुभ माना जाता है.

उड़द की दाल का महत्व

उड़द की दाल का संबंध धार्मिक मान्यताओं में शनि और राहु से जोड़ा जाता है. पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन में उड़द से बनी चीजों का प्रयोग कई जगह किया जाता है. कुछ मान्यताओं में शनिवार को पीपल के नीचे साबुत उड़द रखने और उस पर दही व सिंदूर लगाने की बात कही गई है.

काले तिल का प्रयोग

काले तिल को दान और धार्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि काले तिल का दान बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है. पितृपक्ष में काले तिल डालकर सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा भी है. हवन में काले तिल की आहुति देने को भी शुभ माना जाता है.

कुश का विशेष महत्व

कुश का इस्तेमाल श्राद्ध और तर्पण की विधि में किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कुश का संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है. पितरों को जल देते समय हाथ में कुश रखना श्राद्ध की महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है. कुश मिले जल से स्नान करना भी पितृपक्ष में शुभ माना जाता है.

पितृपक्ष में सेवा और दान भी करें

पितृपक्ष केवल पूजा तक सीमित नहीं माना जाता. इस दौरान पशुओं की सेवा करें और जरूरतमंद लोगों को भोजन या अनाज का दान करें. धार्मिक मान्यता है कि सेवा, दान और श्रद्धा से किए गए कार्य पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम हैं.

 

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