पूरे भारत व छत्तीसगढ़ में गणेशोत्सव की वजह से रौनक है. चौक चौराहों पर भव्य गणेश पंडाल बने हैं. इन पंडालों में भगवान गणेश की आकर्षक मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. पंडाल अलग-अलग थीम पर डिजाइन किए गए हैं. खास बात यह है कि ये पंडाल खास संदेश भी दे रहे हैं. हमारे सवाददाता रघुनंदन पंडा की ये विशेष ग्राउंड रिपोर्ट गणेश पंडाल से.
छत्तीसगढ़ के लधु भारत भिलाई नगर मे गणेश उत्सव में हर साल कुछ नया और अनोखा करने के लिए पहचान बना चुकी न्यू आजाद गणेश उत्सव समिति सेक्टर-2 इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण पंडाल बनाई है. इस बार समिति का भव्य गणेश पंडाल ‘मन्नत मंदिर’ तारा पीठ बंगाल की थीम पर तैयार किया गया है. खास बात यह है कि पंडाल में भगवान गणेश के 21 फीट बड़ी मूर्ति के दर्शन से पहले गणेश श्रद्धालुओं को माता तारा के चरणों के दर्शन कर रहे है. आस्था के साथ-साथ इस बार पंडाल में प्रकृति और पक्षियों की झलक भी देखने को मिल रहा है.
मन्नत मंदिर की थीम पर गणेश पंडाल
भिलाई के सेक्टर-2 में इस बार गणेश उत्सव के लिए तैयार किया गया पंडाल श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और कला का अनोखा अनुभव करा रहा है. करीब 140 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा यह विशाल पंडाल ‘मन्नत मंदिर’ की थीम पर तैयार किया गया है. पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सबसे पहले माता तारा के चरणों के दर्शन करने के बाद भक्त आगे बढ़कर भगवान गणेश के दर्शन कर रहे है. माता के समक्ष श्रद्धालु अपनी मनोकामना रखकर मन्नत की डोर भी बांध रहे है . इसी विचार को केंद्र में रखते हुए पूरे पंडाल को मंदिर के स्वरूप में तैयार किया गया है.
इस पंडाल की सबसे खास बात इसकी सजावट है. समिति ने इस बार पंडाल को प्रकृति और पक्षियों की थीम से जोड़ा है. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री से बचते हुए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. पंडाल में पेड़ के सूखे पत्ते, पेड़ों की छाल, विशेष प्रकार के बांस, मिट्टी की मटकियां, सूखे तालपत्र, बेल फल के खोल, सूखे कमल और बांस की स्टिक जैसी सामग्रियों से सजावट की गई है. पंडाल के अंदर पहुंचने पर श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे वे किसी खूबसूरत प्राकृतिक दुनिया का हिस्सा बन गए हो.
पश्चिम बंगाल से आए कारीगरों ने बनाया विशेष गणेश पंडाल
धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और पारंपरिक कला को एक साथ जोड़ने की यह कोशिश इस बार के गणेश उत्सव को खास बना रही है. इस भव्य पंडाल को तैयार करने के लिए कोलकाता से करीब 50 विशेषज्ञ कारीगरों की टीम के सदस्यों ने रात-दिन काम किया है. इनमें करीब 45 कारीगर लगातार पंडाल निर्माण और सजावट के काम में लगे रहे. पिछले करीब 45 दिनों से दिन-रात मेहनत कर कारीगरों ने पंडाल को अंतिम रूप दिया.
गणेश उत्सव समिति सेक्टर-2 हर साल अपने अलग-अलग थीम वाले पंडालों के लिए चर्चा में रहती है. इस बार भी समिति की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को सिर्फ भगवान गणेश के दर्शन ही नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक और प्राकृतिक अनुभव मिले, जिसे वे लंबे समय तक याद रखें. यानी इस बार सेक्टर-2 का न्यू आजाद गणेशोत्स समिति द्वारा गणेश पंडाल को आस्था, मन्नत, प्रकृति और कला का अनोखा संगम एक सेतु का काम कर रहा है. वही गणेश पंडाल देखने आए अजय साहू ने बताया कि बहुत बड़ा पंडाल भिलाई का है. पूरे भिलाई में इस वर्ष पर्यावरण के लिए काम किया गया है. बढ़ते प्रदूषण के कारण चिड़िया देखने को नहीं मिल रही. समिति ने पर्यावरण को बचाने के लिए अच्छा काम किया है.
बनाया गया है तारा पीठ
भक्त कोरमा राव ने बताया कि भीड़ उमड़ते जा रही है, लुप्त होता पक्षी को बचाने का काम किया जा रहा है. जंगल को बचाने का काम करना है. नेपाल में जो बाढ़ आया था, वह कहीं न कहीं पेड़-पौधे को काटने का फल है, आने वाले को सन्देश देना है पेड़-पौधे हरियाली के लिए लगाना है. जे.श्री निवास राव आयोजक न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति सेक्टर-02 भिलाई नगर ने बताया कि समिति का 42वां वर्ष है. हर साल एक अलग थीम रहती है. पूजा के साथ देश बचाने का काम करना है, पर्यावरण बचाना है. इस वर्ष तारा पीठ बनाया गया है. अंदर आएंगे तो पतल का पंडाल दिखेगा. पक्षी को बचाना है, पक्षी लुप्त होते जा रही है. उनको बचाना है. 500 घोसले बनाए गए हैं. मटकी है, ताड़ का पत्ता, गुडल का फुल है. समिति का प्रयास है अलग नया चीज है. गणेश मूर्ति पांडिचेरी के एक मन्दिर का गणेश है, मनोकामना मन्दिर पूरे पूजा पंडाल का नाम है, जो भी चुनरी बांधता है, उनकी मनोकामना पूरी होता है. मूर्ति को बनाने के लिए वेस्ट बंगाल से कारिगर आए हैं.