भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे आशीर्वाद लेकर ही की जाती है. हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से गणेश भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली एकदंत संकष्टी चतुर्थी इस बार 5 मई 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन भक्त गणेश जी की कृपा पाने के लिए कठोर व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं.
एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 5 मई 2026 को सुबह 05:24 बजे से होगा और इसका समापन 6 मई 2026 को सुबह 07:51 बजे होगा. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है. इस दिन चंद्रमा का उदय रात 10:35 बजे होगा, जिसके बाद व्रत का पारण किया जाएगा.
व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं. भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे भक्तों के जीवन से सभी कष्ट और रुकावटें दूर करते हैं. जो लोग पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को तामसिक भोजन, नशा और गलत आचरण से दूर रहना चाहिए.
पूजा विधि और नियम
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर और पूजा स्थल को साफ किया जाता है. इसके बाद लकड़ी की चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है. पूजा के दौरान घी का दीपक जलाया जाता है और गणेश जी को हल्दी का तिलक लगाया जाता है.
भक्त गणेश जी को फूलों की माला, दूर्वा घास और लड्डू का भोग अर्पित करते हैं. इसके साथ ही फल, विशेष रूप से केला और मीठा पान भी चढ़ाया जाता है. पूजा के दौरान संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है.
गणेश मंत्रों का 108 बार जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है. इसके बाद गणेश जी की आरती की जाती है, जैसे 'जय गणेश जय गणेश देवा' और 'शेंदूर लाल चढ़ायो'. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है और सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है.
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