Advertisement

13 हजार पेन से बनाई मां दुर्गा की प्रतिमा, कोलकाता में दिखा कला और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम

कोलकाता में इस बार एक ऐसी प्रतिमा तैयार की गई है, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. यहां हजारों प्लास्टिक पेन और रिफिल को जोड़कर मां दुर्गा की आकृति बनाई गई है.

pen Durga Sculpture
तपस सेनगुप्ता
  • कोलकाता,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:00 PM IST

दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की प्रतिमाएं अपनी भव्यता और खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन कोलकाता में इस बार एक ऐसी प्रतिमा तैयार की गई है, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. यहां हजारों प्लास्टिक पेन और रिफिल को जोड़कर मां दुर्गा की आकृति बनाई गई है. खास बात यह है कि इस कलाकृति को बनाने में करीब 13 हजार पेन और इतने ही रिफिल का इस्तेमाल हुआ है. यह अनोखी पहल दिखाती है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों से भी बड़ी कलाकारी की जा सकती है और बेकार समझे जाने वाले प्लास्टिक को नया रूप दिया जा सकता है.

कोलकाता के त्रिधारा सम्मिलनी दुर्गा पूजा पंडाल में इस अनोखी कलाकृति को प्रदर्शित किया गया है. इसे कोलकाता के मशहूर कलाकार चंद्रनाथ साहा ने तैयार किया है. पेंटोनिक पेन बनाने वाली कंपनी लिंच लिमिटेड की ओर से प्रस्तुत इस कलाकृति में करीब 13 हजार पेन और 13 हजार रिफिल का इस्तेमाल किया गया है. ये सभी रिसाइकिल प्लास्टिक मटेरियल से बने हैं.

करीब 5.5 फीट ऊंची, 4.5 फीट चौड़ी और 3 फीट गहरी इस प्रतिमा को तैयार करने के लिए हजारों पेन को बेहद खास तरीके से जोड़ा गया है. आमतौर पर लिखने के काम आने वाले पेन से मां दुर्गा की आकृति तैयार करना अपने आप में एक अनोखा प्रयोग है. यह कलाकृति लोगों को पारंपरिक कला से अलग कुछ नया देखने का मौका दे रही है.

कलाकार ने साधारण पेन को दिया खास रूप
कलाकार चंद्रनाथ साहा के लिए इस प्रतिमा को बनाना एक अलग तरह की चुनौती थी. उन्होंने पेन जैसी साधारण चीज को मां दुर्गा के रूप में ढालने की कोशिश की. उनके मुताबिक, जब हजारों पेन एक साथ जुड़ते हैं, तो उनकी अलग-अलग पहचान बदल जाती है और उनसे एक बड़ी कलाकृति उभरकर सामने आती है. इस काम में इस्तेमाल की गई सामग्री ने पूरी प्रक्रिया को खास बना दिया.

पूजा के बाद भी बेकार नहीं जाएंगे पेन
इस कलाकृति की खासियत सिर्फ इसका अनोखा रूप नहीं, बल्कि इसे बनाने का तरीका भी है. इसे त्रिधारा सम्मिलनी की मुख्य दुर्गा प्रतिमा से अलग रखा गया है. जहां मुख्य प्रतिमा का पारंपरिक तरीके से विसर्जन होगा, वहीं पेन से बनी इस कलाकृति को विसर्जित नहीं किया जाएगा. दुर्गा पूजा खत्म होने के बाद इसे खोलकर इसमें इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक को दोबारा रिसाइकिल करने के लिए भेजा जाएगा. इसके बाद इस सामग्री से नए उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकेंगे. इस तरह यह पहल लोगों को संदेश देती है कि प्लास्टिक का सही तरीके से दोबारा इस्तेमाल करके पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है. कोलकाता की यह कलाकृति दिखाती है कि परंपरा और आधुनिक सोच को साथ लेकर कला का एक नया रूप तैयार किया जा सकता है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement