भगवान श्रीकृष्ण की लीला के साक्षी रहे मथुरा-वृंदावन दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब आस्था के साथ आधुनिक सुविधाओं का भी बेहतर अनुभव मिलेगा. द्वापर युग में आस्था से जुड़ा अक्रूर घाट अब धार्मिक चेतना और पर्यटन विकास का नया केंद्र बनेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने वृंदावन में यमुना नदी के दाहिने तट पर स्थित अक्रूर घाट के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के लिए 6.35 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी देते हुए 3.17 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं.
अक्रूर घाट का है विशेष पौराणिक महत्व
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन की पवित्र भूमि पर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर दर्शन अनुभव उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि अक्रूर घाट का विशेष पौराणिक महत्व है. यह भगवान श्रीकृष्ण व बलराम से जुड़ी कथाओं का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर भव्य मेले का आयोजन होता है. मंत्री ने ये भी बताया कि धार्मिक पर्यटन के प्रति बढ़ते रुझान, बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के विस्तार के चलते उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में शीर्ष स्थान पर पहुंचा है. नतीजतन, वर्ष 2025 में 10.24 करोड़ से अधिक पर्यटक मथुरा पहुंचे.
परियोजना अंतर्गत ये होंगे कार्य
परियोजना के तहत अक्रूर घाट के विकास को लेकर व्यापक कार्य किए जाएंगे. 30 मीटर लंबाई में 14 मीटर और 5 मीटर गहराई तक शीट पाइलिंग की जाएगी. दोनों शीट पाइल को जोड़ने के लिए हर 3 मीटर पर 45 एमएम व्यास की. एंकर बार लगाई जाएगी. इसके अलावा 5 मीटर चौड़े स्नान प्लेटफॉर्म का निर्माण होगा. घाट की सीढ़ियों और पटरा का निर्माण किया जाएगा, जिन पर लाल पत्थर लगाया जाएगा. घाट पर पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 220 मीटर लंबा चैनल भी खोदा जाएगा. साथ ही अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम हिस्सों में स्लोप पिचिंग का कार्य कराया जाएगा, जिससे घाट की संरचना मजबूत और सुरक्षित बनी रहे.
जब अक्रूर ने पहचाना श्रीकृष्ण का परम स्वरूप
मथुरा-वृंदावन मार्ग पर यमुना तट स्थित अक्रूर घाट का पौराणिक महत्व है. मान्यता है कि जब कंस के बुलावे पर अक्रूर जी श्रीकृष्ण और बलराम को लेकर मथुरा जा रहे थे, तब इसी स्थान पर विश्राम के दौरान यमुना स्नान करते समय उन्हें जल के भीतर भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में श्रीकृष्ण और बलराम के दिव्य दर्शन हुए. इस अलौकिक अनुभूति ने अक्रूर जी को यह विश्वास दिलाया कि श्रीकृष्ण कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं नारायण के अवतार हैं. यही कारण है कि अक्रूर घाट आज भी श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और रहस्य से भरा पवित्र स्थल बना हुआ है.
रेल-सड़क मार्ग से पहुंचना आसान
जनपद मथुरा का रेलवे स्टेशन बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए प्रमुख आगमन बिंदु है, जहां अधिकांश ट्रेनें ठहरती हैं. रेलवे स्टेशन के समीप ही बस स्टैंड स्थित होने से आवागमन और भी सुगम हो जाता है. अक्रूर घाट की दूरी मथुरा रेलवे स्टेशन से लगभग 16 किलोमीटर और नए बस स्टैंड से करीब 15 किलोमीटर है, जिससे यात्रियों को वहां तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी.
रंगोत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी मथुरा की पहचान
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में मथुरा-वृन्दावन को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ब्रज में आयोजित होने वाले भव्य रंगोत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी जैसे आयोजनों में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का विशाल जनसमूह पहुंचता है. रंगोत्सव-2026 के मुख्य दिवसों पर 44 लाख से अधिक श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के ब्रज आगमन ने इस क्षेत्र की वैश्विक लोकप्रियता और आध्यात्मिक आकर्षण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. अक्रूर घाट का निर्माण ब्रज क्षेत्र में पर्यटन विकास को नया आयाम देगा.