वैदिक पंचांग के मुताबिक आज यानी 14 सितंबर को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जा रहा है. यह दिन महादेव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत करती हैं. इस दिन व्रती अन्न और जल भी ग्रहण नहीं करती हैं. इस दिन जल तक ग्रहण करने की मनाही होती है. लेकिन ऐसा क्यों है? इसके पीछे की क्या मान्यताएं हैं? इस व्रत में पानी पीने से क्या होता है? चलिए आपको उनके बारे में बताते हैं.
हरतालिका तीज में पानी पीने की मनाही क्यों?
हरतालिका तीज का व्रत पूर्णत: निर्जला रखा जाता है. इस दिन पानी पीने की मनाही होती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं हैं. पौराणिक कथाओं के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए जंगल में कठोर तपस्या की थी. मां पार्वती का व्रत निर्जला था. जंगल में कठिन तपस्या के दौरान पार्वती ने अन्न और जल ग्रहण नहीं किया. इस दौरान मां पार्वती रेत के शिवलिंग की पूजा की थी. उनकी कठिन तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनको पत्नी के रूप में स्वीकार किया. मां पार्वती की अटूट और कठिन तपस्या की याद में महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. इसके साथ ही महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं.
व्रत में पानी पीने से क्या होता है?
हरतालिका तीज पर पानी पीने की मनाही है. लेकिन अगर किसी ने ऐसा कर दिया तो क्या होगा? मान्यताएं हैं कि हरतालिका तीज पर जल का सेवन करने से अगला जन्म मछली का मिलता है. ऐसे में व्रत के अगले दिन ही जल का सेवन करके व्रत का पारण करना चाहिए. अगर हरतालिका तीज में मीठी चीजें खाने से स्त्री का अगला जन्म मक्खी का होता है.
अगर हरतालिका तीज में कोई व्रती महिला भूलकर भी फल खा लिया तो उसको इसका दंड मिलता है. ऐसी मान्यता है कि महिला का अगला जन्म बंदर का होता है.
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