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खजुराहो के जवारी मंदिर में नवंबर में फिर दिखेगी भगवान विष्णु की मूर्ति? मस्तक मिलने का दावा, जोड़ने की तैयारी

राकेश दलाल ने पुरातत्व विभाग से कानून और भारतीय सनातन संस्कृति का हवाला देते हुए मांग की है कि विष्णु मूर्ति के इस पावन विग्रह पर मस्तक लगाकर उसकी विधिवत प्रतिष्ठा की जाए.

Khajuraho Jawari Temple
gnttv.com
  • हिसार,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:05 AM IST

मूर्ति रक्षित मूर्ति संरक्षित फाउंडेशन के चेयरमैन राकेश दलाल ने कहा कि खजुराहो के जवारी मंदिर की ऐतिहासिक विष्णु मूर्ति के संदर्भ में एक बड़ी व सुखद जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि जवारी मंदिर की ऐतिहासिक विष्णु मूर्ति के मस्तक (शीश) की खोज हो चुकी है. पुरातत्व विभाग द्वारा आगामी नवंबर माह में इस पावन मूर्ति के दर्शन विवरण की एक प्रस्तावित प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसके तहत मस्तक को वापस विग्रह से जोड़ा जाएगा. राकेश दलाल ने इसे हमारी प्राचीन कलात्मक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी और बेहद सराहनीय कदम बताया है.

नीतिगत सुधारों और नेतृत्व का स्वागत
राकेश दलाल ने इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे सरकार के नीतिगत बदलावों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार द्वारा प्राचीन खंडित मूर्तियों के शास्त्र-सम्मत प्रतिस्थापन और उनके संपूर्ण जीर्णोद्धार को लेकर लिए गए विवेकपूर्ण निर्णयों ने इस राह को आसान बनाया है. नियमों में सामयिक सुधार: बरसों से चले आ रहे पुरातत्व विभाग के कड़े और जटिल नियमों में समय के अनुकूल जो प्रशासनिक सुधार किए गए हैं, उसी के कारण आज यह ऐतिहासिक कार्य जमीन पर संभव हो सका है. प्रशासनिक समन्वय की जीत: पुरातत्व विभाग द्वारा अपने इस क्रांतिकारी लक्ष्य को प्राप्त करना यह दर्शाता है कि एक मजबूत नेतृत्व और प्रशासनिक इच्छाशक्ति से देश की अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित किया जा सकता है. इस ऐतिहासिक पहल के लिए राकेश दलाल ने भारत सरकार, पुरातत्व विभाग और इस प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों का दिल की गहराइयों से धन्यवाद किया है.

सनातन संस्कृति के अनुसार विधिवत प्रतिष्ठा की मांग
राकेश दलाल ने पुरातत्व विभाग से कानून और भारतीय सनातन संस्कृति का हवाला देते हुए मांग की है कि विष्णु मूर्ति के इस पावन विग्रह पर मस्तक लगाकर उसकी विधिवत प्रतिष्ठा की जाए. इसके साथ ही उन्होंने 24 नवंबर 2026 को मंदिर परिसर में पूजा करने और एक दीप प्रज्वलित करने की अधिकृत आज्ञा मांगी है. 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर फाउंडेशन अपने 'एक दीप एक संकल्प' अभियान को विश्व व्यापक स्तर पर ले जाने की तैयारी में है. राकेश दलाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक प्रतिमा के खंडित मस्तक को ठीक करने और मंदिर को संरक्षित करने का अधिकार प्राप्त करने के लिए उन्होंने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (डायरी नंबर 32820/2025) दायर की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे पुरातत्व का मामला बताते हुए खारिज कर दिया था. इस दौरान चीफ जस्टिस द्वारा की गई टिप्पणी "जाओ अपने देवता से कहो" पर काफी विवाद हुआ था और दुनिया भर के सनातन संस्कृति प्रेमी आहत हुए थे.

सीबीआई जांच और यूनेस्को (UNESCO) से गुहार
कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी राकेश दलाल ने अपना संघर्ष नहीं छोड़ा. उन्होंने बताया कि इस बहुमूल्य ऐतिहासिक प्रतिमा के मस्तक को गायब किए जाने/खोखला करने और प्राचीन कलाकृतियों की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी की साजिश की आशंका को देखते हुए उन्होंने देश के गृह मंत्री और सांस्कृतिक मंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है. इसके अतिरिक्त, उन्होंने 24 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले 'एक दीप एक संकल्प' अभियान को विश्वव्यापी रूप देने के लिए यूनेस्को (UNESCO) के डायरेक्टर से भी लिखित अपील की है. राकेश दलाल ने देश-दुनिया की आम जनता से अपील की है कि वे आगामी 24नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने घरों और मंदिरों में 'एक दीप' जलाकर इस 'एक दीप एक संकल्प' अभियान का हिस्सा बनें.

-प्रवीण कुमार की रिपोर्ट

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