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16 साल के लक्ष्य की अनोखी भक्ति, 9 दिन तक हाथ में जलाए रखेंगे माता की ज्योत; भजन सुनने उमड़ रहे लोग

लक्ष्य अरोड़ा का कहना है कि आज के समय में बच्चों को मोबाइल फोन के साथ-साथ धार्मिक कथाओं, सत्संग और भजन-कीर्तन से भी जुड़ना चाहिए. बच्चों को सनातन संस्कृति और भगवान के प्रति आस्था के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए.

Lakshay Arora
gnttv.com
  • हिसार,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST

छोटी उम्र में बड़ी आस्था और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश कर रहे हिसार की इंदिरा कॉलोनी निवासी 16 वर्षीय लक्ष्य अरोड़ा इन दिनों माता रानी की भक्ति में लीन हैं. नवरात्रों के अवसर पर लक्ष्य ने अपने हाथ में माता की ज्योत जलाकर नौ दिनों तक 24 घंटे माता की आराधना करने का संकल्प लिया है. बचपन से ही धार्मिक गीतों और भजन-कीर्तन में रुचि रखने वाले लक्ष्य की इस पहल की कॉलोनी में काफी चर्चा हो रही है. उनकी श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक गीतों के प्रति लगाव को देखकर मोहल्ले के लोग भी प्रभावित हैं. लक्ष्य के आसपास बच्चे और बड़े एकत्रित होकर भजन-कीर्तन में भाग ले रहे हैं, जिससे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है.

बचपन से ही भजन-कीर्तन में रही रुचि
लक्ष्य अरोड़ा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही भजन-कीर्तन में रुचि रही है. माता रानी के प्रति उनके मन में शुरू से ही विशेष श्रद्धा और भाव रहे हैं. वह धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते थे और भजन-कीर्तन के दौरान गाने व नाचने में उन्हें आनंद मिलता था. समय के साथ उनकी धार्मिक रुचि और अधिक बढ़ती गई. मंदिरों में माता की ज्योत जलती देखकर उनके मन में भी नवरात्रों के दौरान माता की ज्योत जलाकर आराधना करने की इच्छा जागी.

लक्ष्य ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ भूना क्षेत्र की एक ढाणी में आयोजित कीर्तन में गए थे. वहां धार्मिक माहौल और माता की भक्ति से प्रेरित होकर उनके मन में हाथ में ज्योत जलाने का विचार आया. इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता के सामने अपनी इच्छा रखी. परिवार की सहमति मिलने पर उन्होंने इस नवरात्र में पहली बार माता की ज्योत जलाने का संकल्प लिया.

पहले दिन विधि-विधान से हुआ ज्योत प्रज्ज्वलन
लक्ष्य ने बताया कि ज्योत प्रज्ज्वलित करने के पहले दिन पंडित को बुलाया गया और विधि-विधान के साथ दीप प्रज्ज्वलित किया गया. इसके बाद से वह माता रानी की आराधना में जुटे हुए हैं. शाम के समय घर में भजन-कीर्तन किया जाता है, जिसमें कॉलोनी के लोग भी शामिल होते हैं. लक्ष्य का कहना है कि माता रानी के प्रति श्रद्धा और विश्वास ही उन्हें इस धार्मिक संकल्प से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं.

उनकी इस पहल में परिवार के सदस्यों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है. दादी उषा रानी और माता अनु की सहमति के बाद ही उन्होंने यह संकल्प शुरू किया. परिवार के लोग भी उनकी धार्मिक रुचि और भजन-कीर्तन के प्रति लगाव को बचपन से देखते आ रहे हैं.

हरियाणवी भजनों के माध्यम से जगा रहे भक्ति की अलख
लक्ष्य अरोड़ा केवल माता की ज्योत जलाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वह धार्मिक गीत भी मधुर अंदाज में गाते हैं. उन्हें हरियाणवी भाषा में भजन गाना विशेष रूप से पसंद है. लक्ष्य के अनुसार, उन्हें करीब 100 से 150 तक धार्मिक और हरियाणवी भजन याद हैं. उनके गीत सुनने के लिए मोहल्ले के लोग एकत्रित होते हैं और बच्चे भी उनके साथ भक्ति में शामिल होते हैं.

लक्ष्य ‘जागो-जागो ऐ जवाला माई जागो, हम तुम्हें मनाने आए, तुमको रिझाने आए’, ‘काली मैया तेरी ज्योत जलाई’, ‘माता री आइये गौरख के जोड़े में’ और ‘मां शेरावाली, मां शेरावाली’ जैसे भजन गाते हैं. इन गीतों के माध्यम से वह लोगों में धार्मिक आस्था और श्रद्धा का भाव जगाने का प्रयास कर रहे हैं.

बच्चों को मोबाइल से दूर कर धर्म और संस्कृति से जोड़ने का संदेश
लक्ष्य अरोड़ा का कहना है कि आज के समय में बच्चों को मोबाइल फोन के साथ-साथ धार्मिक कथाओं, सत्संग और भजन-कीर्तन से भी जुड़ना चाहिए. बच्चों को सनातन संस्कृति और भगवान के प्रति आस्था के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों को धार्मिक कार्यक्रमों में लेकर जाना चाहिए, ताकि उनमें अच्छे संस्कार विकसित हों और वे अपनी संस्कृति को समझ सकें.

लक्ष्य के मुताबिक, कॉलोनी में ऐसे बच्चे भी उनके पास आने लगे हैं, जो पहले धार्मिक गतिविधियों में ज्यादा रुचि नहीं लेते थे. अब वे भी उनके साथ बैठकर भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं. इससे उन्हें खुशी मिलती है. उनका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक बच्चे धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ें.

दादी बोलीं-बचपन से सत्संग में जाने का शौक
लक्ष्य की दादी उषा रानी ने बताया कि लक्ष्य बचपन से ही सत्संग में जाता था. वहां वह भजन सुनकर खुश होता था और गाने के साथ नाचने में भी रुचि लेता था. धार्मिक कार्यक्रमों में उसकी दिलचस्पी हमेशा से रही है. जब उसने हाथ में माता की ज्योत जलाने की इच्छा जताई तो परिवार को लगा कि यह कठिन संकल्प है, लेकिन उसकी आस्था और लगन को देखते हुए उन्होंने सहमति दे दी.

दादी ने बताया कि लक्ष्य के पिता ड्राइवर हैं. लक्ष्य मोबाइल पर भी सत्संग और कीर्तन से जुड़े गीत देखता-सुनता रहता है. परिवार के लोग उसकी धार्मिक रुचि से परिचित हैं. उन्होंने बताया कि मोहल्ले के लोग भी लक्ष्य की भक्ति को देखकर कहते हैं कि उनके घर में प्रह्लाद जैसा भक्त है, जो छोटी उम्र में माता की आराधना में लगा हुआ है.

मोहल्ले के लोग भी कर रहे लक्ष्य की सराहना
कॉलोनी निवासी हरजिंद्र कौर ने कहा कि लक्ष्य अरोड़ा काफी होनहार बच्चा है. इतनी कम उम्र में उसकी धार्मिक आस्था और भक्ति देखकर अच्छा लगता है. वह दिन-रात माता की ज्योत के साथ अपने संकल्प में जुटा हुआ है. उसकी भक्ति को देखकर अन्य बच्चे भी वहां आने लगे हैं और धार्मिक गतिविधियों में रुचि ले रहे हैं.

लक्ष्य के साथी विजय कुमार ने कहा कि लक्ष्य के मन में माता रानी के प्रति गहरी श्रद्धा है. छोटी उम्र में ऐसा संकल्प लेना उसके विश्वास और भक्ति को दर्शाता है. विजय के अनुसार, लक्ष्य घर में श्याम बाबा की सेवा भी करता है. उन्होंने कहा कि माता रानी के प्रति उसकी भावना देखकर हर किसी को अच्छा लगता है और मोहल्ले के लोग भी उसकी भक्ति से प्रभावित हैं.

रोजाना हो रहे भजन-कीर्तन, कॉलोनी में भक्तिमय माहौल
इंदिरा कॉलोनी निवासी श्याम सुंदर ने बताया कि कॉलोनी में रोजाना भजन-कीर्तन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोग शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि छोटी उम्र में इस तरह की धार्मिक भावना उन्होंने पहली बार देखी है. लक्ष्य की भक्ति से बच्चों में भी धार्मिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ रही है.

लक्ष्य की चाची ज्योति ने कहा कि लक्ष्य अपनी धार्मिक आस्था के माध्यम से लोगों को अच्छा संदेश दे रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों को धर्म और संस्कृति से जोड़ना जरूरी है. घर में रोजाना होने वाले कीर्तन में छोटे बच्चे भी शामिल हो रहे हैं, जो सकारात्मक पहल है.

आस्था के साथ संस्कारों का संदेश
16 वर्षीय लक्ष्य अरोड़ा की यह पहल केवल माता की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वह बच्चों और युवाओं को भजन-कीर्तन, सत्संग और सनातन संस्कृति से जुड़ने का संदेश भी दे रहे हैं. उनकी धार्मिक रुचि, मधुर भजन और माता रानी के प्रति श्रद्धा ने कॉलोनी के लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. परिवार और मोहल्ले के लोगों के सहयोग के बीच लक्ष्य अपने नौ दिवसीय धार्मिक संकल्प को पूरा करने में जुटे हैं.

-प्रवीण कुमार की रिपोर्ट

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