हिंदू धर्म रहस्यों से भरा हुआ है, और उन रहस्यों के स्वामी भगवान शिव माने जाते हैं. भगवान शिव साक्षात 'स्वयंभू' हैं. जिनकी न तो उत्पत्ति है और न अंत. फिर भी धर्म और ज्ञान की रक्षा के लिए भगवान शिव समय-समय पर अवतार लेते रहे हैं. आज हम आपको उनके ऐसे ही 11 अवतारों के बारे में बता रहे हैं, जिनकी भक्ति और पूजा करने से भय और संकट दूर भाग जाते हैं और अध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है.
1. काल भैरव
काल भैरव को भगवान शिव का सबसे उग्र रूप माना जाता है. एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी का अहंकार बढ़ गया था, तब शिव ने काल भैरव का रूप धारण किया और ब्रह्मा जी का पांचवां सिर अलग कर दिया. कहा जाता है कि वह सिर अहंकार का प्रतीक था, इसलिए उसे हटाना आवश्यक था.
2. नटराज
भगवान शिव परम ब्रह्म माने जाते हैं. उनके एक नृत्य से सृष्टि का सृजन होता है और तांडव से लाखों ब्रह्मांड का विनाश. नटराज रूप शिव की उस नित्य अवस्था को दर्शाता है, जो सृजन और विनाश दोनों का संतुलन है.
3. अर्धनारीश्वर
यह रूप शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है. यह स्त्री और पुरुष ऊर्जा के संतुलन और प्रकृति के सामंजस्य को दर्शाता है.
4. महाकाल
महाकाल का रूप समय के संतुलन का प्रतीक है. माना जाता है कि स्वयं काल भी इनके अधीन है. शिव का यह स्वरूप ज्योतिर्लिंग के रूप में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.
5. भैरव
भैरव भगवान शिव का शक्तिशाली और रक्षक रूप है. इनकी पूजा से भय दूर होता है और मनुष्य में साहस की भावना बढ़ जाती है.
6. दक्षिणामूर्ति
इस अवतार में भगवान शिव बरगद के पेड़ के नीचे बैठ कर संसार को ज्ञान देते नजर आते हैं. इसे भगवान का गुरु स्वरूप भी कहते हैं. भगवान के इस रूप की पूजा करने से अध्यात्म और ज्ञान की प्राप्ति होती है.
7. अघोर
ये भगवान शिव का वह रूप है, जिसमें वह शक्ति विहीन हैं. शक्ति से मतलब है मां पार्वती का. इस रूप में भगवान तपस्वी और बैरागी रूप में हैं. भगवान का ये रूप बताता है कि संसार एक माया है और सत्य केवल मृत्यु.
8. रुद्र
रुद्र शिव का प्राचीन रूप है, जो प्रकृति की तीव्र शक्ति और विनाश का प्रतीक माना जाता है.
9. पशुपतिनाथ
यह रूप सभी जीवों के प्रति करुणा और संरक्षण का संदेश देता है. पशुपतिनाथ का स्वरूप नेपाल में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित है.
10. वीरभद्र
कथा है कि जब पिता द्वारा अपमान किए जाने पर सती ने अपना शरीर त्यागा था, तब वीरभद्र ने सती के पिता दक्ष का सिर एक बार में काट कर अलग कर दिया था. भगवान का ये स्वरूप भी उग्रता और विनाश को दर्शाता है.
11. हनुमान
कथाओं में हनुमान जी को भगवान शिव का अंश माना जाता है. पुराणों में लेख है कि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं, जिन्हें भक्ति, शक्ति और सेवा के रूप में पूजा जाता है.
ये भी पढ़ें