Rakhi Rituals Rules: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. इस सास रक्षाबंधन 28 अगस्त दिन शुक्रवार को है. रक्षाबंधन के दिन जहां बहनें अपने भाई के सुखी जीवन और लंबी उम्र की कामना करते हुए उसकी कलाई पर राखी बांधती हैं तो वहीं भाई अपनी बहन को जीवनभर रक्षा करने का वचन देते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं कि रक्षाबंधन पर सगी बहन भाई के पास नहीं आ पाए तो कौन-कौन राखी बांध सकता है, हम यह भी बताएंगे कि यदि कोई सगी बहन नहीं है तो क्या कलाई पर राखी नहीं बांधी जा सकती?
बहन के नहीं आने पर कौन बांध सकता है राखी
यदि रक्षाबंधन के दिन किसी कारण से सगी बहन भाई के पास राखी नहीं आ पाती है तो भाई को मायूस होने की जरूरत नहीं है. ऐसे में परिवार में मौजूद दूसरी महिला रिश्तेदार भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं. चचेरी, ममेरी या फुफेरी बहन राखी बांध सकती है. आपको मालूम हो कि इन रिश्तों में भी भाई-बहन जैसा ही स्नेह और अपनापन होता है. सगी बहन के नहीं होने पर आप दूसरी बहनों से रक्षासूत्र बंधवा सकते हैं.
बेटी या भतीजी भी बांध सकती है राखी
आपको मालूम हो कि रक्षाबंधन पर सगी बहन किसी वजह से मौजूद न हो तो बेटी या भतीजी राखी बांध सकती है. बेटी या भतीजी अपने पिता, चाचा या दूसरे पारिवारिक सदस्यों को रक्षासूत्र बांध सकती है. आपको मालूम हो कि इसमें रिश्ते से ज्यादा महत्व उस भावना का होता है जिसके साथ राखी बांधी जाती है.
मां अपने बेटे को बांध सकती हैं राखी
वैसे तो रक्षाबंधन भाई-बहन का त्योहार है लेकिन यदि बहन मौजूद न हो तो मां भी बेटे को राखी बांध सकती है. आपको मालूम हो कि मां और बेटे का रिश्ता वैसे ही प्रेम और सुरक्षा से जुड़ा होता है. ऐसे में मां द्वारा रक्षासूत्र बांधने का भाव बेटे की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना से जुड़ा हो सकता है.
बुआ भी बांध सकती हैं राखी
यदि आपकी बहन रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए नहीं आ पाती है तो आप बुआ से राखी बंधवा सकते हैं. आपको मालूम हो कि परिवारों में बुआ-भतीजे का रिश्ता भी स्नेह और अपनापन से जुड़ा माना जाता है.
क्या भाभी भी बांध सकती हैं राखी
आपको मालूम हो कि कुछ परिवारों में भाभी अपने देवर की कलाई पर राखी बांधती हैं. यदि सगी बहन किसी कारण से नहीं पहुंच पाती है तो भाभी राखी बांध सकती है. आपको मालूम हो कि सगी बहन किसी मजबूरी या दूरी की वजह से रक्षाबंधन पर मौजूद नहीं है तो परिवार की दूसरी महिला द्वारा रक्षासूत्र बांधकर परंपरा को निभाया जा सकता है.