गुजरात का अनोखा मंदिर, जहां मन्नतें पूरी होने पर, माता को चढ़ाई जाती है शराब...

नर्मदा जिले के सागबारा तालुका में बसे इस मंदिर में गुजरात ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से भी लाखों आदिवासी श्रद्धालु पहुंचते हैं. पांडोरी माता को आदिवासी समाज अपनी कुलदेवी मानता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मानसून के बाद लगने वाले इस मेले में जो भी भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर धन, अनाज या शराब अर्पित करता है, उसे पूरे वर्ष सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

देवमोगरा स्थित पांडोरी माता मंदिर
gnttv.com
  • नर्मदा ,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:48 AM IST

गुजरात में जहां एक ओर शराबबंदी कानून लागू है, वहीं नर्मदा जिले में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां देवी को प्रसाद के रूप में शुद्ध देशी शराब चढ़ाई जाती है. जी हां, यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी बताई जाती है. हम बात कर रहे हैं देवमोगरा स्थित पांडोरी माता मंदिर की, जहां हर साल पांच दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है.

नर्मदा जिले के सागबारा तालुका में बसे इस मंदिर में गुजरात ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से भी लाखों आदिवासी श्रद्धालु पहुंचते हैं. पांडोरी माता को आदिवासी समाज अपनी कुलदेवी मानता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मानसून के बाद लगने वाले इस मेले में जो भी भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर धन, अनाज या शराब अर्पित करता है, उसे पूरे वर्ष सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

माता को चढ़ाई जाती है शराब
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां प्रसाद में शराब चढ़ाने की परंपरा है. गुजरात में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन इस धार्मिक स्थल पर भक्तों को विशेष छूट दी जाती है. श्रद्धालु देवी के चरणों में देशी शराब की बोतल अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं.

क्या है मंदिर का इतिहास
मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 1085 ईसा पूर्व सागबारा के शाही परिवार ने करवाया था. आज भी शिवरात्रि के अवसर पर शाही परिवार पूजा-अर्चना करता है. वर्ष 1983 से मंदिर की व्यवस्था एक ट्रस्ट द्वारा संभाली जा रही है. पहले यह मंदिर बांस और लकड़ी से बने साधारण ढांचे जैसा था, लेकिन अब यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसकी संरचना नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से प्रेरित बताई जाती है.

जंगलों के बीच शांत वातावरण में स्थित यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है. आदिवासी श्रद्धालु पांडोरी माता को मां मेराली, मां याहामोगी या मां याहा मोगराई के नाम से भी पुकारते हैं. मेले के दौरान श्रद्धालु नए वस्त्र पहनकर पारंपरिक नृत्य और उत्सव के साथ अपनी आस्था व्यक्त करते हैं. देवमोगरा का यह अनोखा मंदिर धार्मिक परंपराओं और आदिवासी संस्कृति का जीवंत उदाहरण है, जहां आस्था और परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है.

रिपोर्टर: नरेंद्र पेपरवाला

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!

RECOMMENDED