जालना में गणेशोत्सव के अवसर पर भूगोल प्रदर्शनी का अनोखा दृश्य साकार किया गया है. समर्थ रामदास स्वामी की ओर से स्थापित 11 मारुति की हुबहू प्रतिमाओं के साथ साकार की गई यह भूगोल प्रदर्शनी इन दिनों आकर्षण और चर्चा का विषय बनी हुई है. छात्रों को भूगोल विषय कठिन न लगे और इस विषय की अलग-अलग अवधारणाएं उन्हें आसानी से समझ आएं, इसी उद्देश्य से जालना के उपक्रमशील शिक्षक श्रीकांत चिंचखेडकर ने यह अनोखा शैक्षणिक उपक्रम शुरू किया है. करीब डेढ़ महीने की मेहनत के बाद इस पूरे दृश्य और प्रदर्शनी को तैयार किया गया है.
भक्ति के माहौल में ज्ञान की ज्योत
कई छात्रों को भूगोल का अध्ययन थोड़ा कठिन और उबाऊ लगता है. इसी वजह से छात्रों के मन से भूगोल विषय का डर दूर हो और इस विषय के प्रति उनकी रुचि बढ़े, इस उद्देश्य से शिक्षक श्रीकांत चिंचखेडकर ने गणेशोत्सव के अवसर पर भूगोल को समझाने का यह अनोखा प्रयास किया है. भक्ति के माहौल में ज्ञान की ज्योत जलाते हुए 11 मारुति की प्रतिमाओं के सानिध्य में भूगोल की अद्भुत दुनिया लोगों के सामने पेश की गई है. यहां पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष और पूरे ब्रह्मांड तक की अलग-अलग अवधारणाओं को प्रत्यक्ष मॉडल के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है.
भूगोल की 150 अवधारणाओं को किया गया है प्रदर्शित
इस वर्ष गणेशोत्सव में शिक्षक श्रीकांत चिंचखेडकर ने 'समर्थ रामदास स्वामी द्वारा स्थापित 11 मारुति' का दृश्य साकार किया है. 11 मारुति की प्रतिमाएं हुबहू तैयार की गई हैं. हनुमान की शक्ति, बुद्धि और भक्ति के प्रतीक के माध्यम से छात्रों के भीतर छिपी प्रतिभा और गुणों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी इस दृश्य के जरिए दिया गया है. इसी दृश्य के साथ भूगोल की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई है. पृथ्वी, भारतभूमि, सौरमंडल, ग्रह, अंतरिक्ष और ब्रह्मांड सहित भूगोल की करीब 150 अवधारणाओं को यहां प्रदर्शित किया गया है.
विषय को समझने में होती है आसानी
80 से 90 प्रत्यक्ष मॉडल इस प्रदर्शनी में रखे गए हैं, जो छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों और नागरिकों का भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. इस प्रदर्शनी की खास बात यह है कि प्रत्येक अवधारणा को मराठी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में प्रस्तुत किया गया है. इससे छात्रों को विषय को समझने के साथ-साथ संबंधित शब्दावली से परिचित होने में भी मदद मिल रही है. प्रदर्शनी में पृथ्वी की संरचना, भारत का भौगोलिक स्वरूप, सौरमंडल, विभिन्न ग्रह, अंतरिक्ष और ब्रह्मांड जैसी कई संकल्पनाओं को मॉडल के जरिए समझाया गया है. किताबों में पढ़ी जाने वाली इन संकल्पनाओं को जब छात्र प्रत्यक्ष मॉडल के रूप में देखते हैं, तो उन्हें विषय को समझने में आसानी होती है.
इस अनोखी प्रदर्शनी को देखने के लिए अलग-अलग स्कूलों के छात्र भी पहुंच रहे हैं. छात्र यहां मॉडल देखते हुए भूगोल से जुड़ी जानकारी हासिल कर रहे हैं. शिक्षण को मनोरंजक और आसान बनाने की यह पहल छात्रों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है. यह प्रदर्शनी सभी के लिए नि:शुल्क रखी गई है और विजयादशमी यानी दशहरे तक लोगों के लिए खुली रहेगी. 11 मारुति के दर्शन के साथ ही पृथ्वी, सौरमंडल, अंतरिक्ष और ब्रह्मांड की जानकारी देने वाली यह प्रदर्शनी छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों और आम नागरिकों के लिए भी ज्ञान का अनोखा अनुभव साबित हो रही है. शिक्षक श्रीकांत चिंचखेडकर पिछले 23 वर्षों से सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में अलग-अलग उपक्रम चला रहे हैं. गणेशोत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा और ज्ञान को जोड़ने की उनकी यह पहल जालना में चर्चा का विषय बनी हुई है.