हिंदू धर्मशास्त्रों में शरीर और मन को संतुलित करने के लिए व्रत और उपवास के नियम बनाए गए हैं. तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है, जो माह में दो बार पड़ती है. शुक्ल एकादशी और कृष्ण एकादशी. इस तरह से साल में कुल 24 एकादशी आती है. एकादशी व्रत के मुख्य देवता भगवान विष्णु , कृष्ण या उनके अवतार होते हैं. इनकी पूजा इस दिन की जाती है. चैत्र मास में एकादशी उपवास का विशेष महत्व है, जिससे मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं. खास तौर से गंभीर रोगों से रक्षा होती है. पाप नाश के लिए और अपनी तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का विशेष महत्व है.
29 मार्च को है कामदा एकादशी का पर्व
हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 मार्च को सुबह 8 सुबह 45 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 मार्च को सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च दिन रविवार को रखा जाएगा. रविवार को सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक पूजा के सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा. इस अवधि में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना फलदायी माना जाता है.
कामदा एकादशी के दिन ऐसे करें पूजा
1. इस दिन प्रातः उठकर स्नान करने के बाद पहले सूर्य को अर्घ्य दें, तत्पश्चात भगवान विष्णु और कृष्ण की आराधना करें.
2. पूजा घर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर श्री हरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें.
3. इसके बाद गंगाजल से पूरे घर और पूजा स्थल को पवित्र करें.
4. भगवान विष्णु को चंदन, पुष्प, फल, धूप-दीप, मिष्ठान, पंचामृत, आदि अर्पित करें.
5. कामदा एकादशी व्रत की कथा कहें और पूजा के अंत में आरती जरूर करें.
6. इस व्रत को नियमपूर्वक करने के बाद अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें.
मन को ईश्वर में लगाएं
कामदा एकादशी के दिन पूर्ण रूप से जलीय आहार लें अथवा फलाहार लें तो इसके श्रेष्ठ परिणाम मिलेंगे. अगर केवल एक वेला का उपवास रखते हैं तो दूसरी वेला में वैष्णव भोजन ही ग्रहण करें. अगले दिन प्रातः एक वेला का भोजन या अन्न किसी निर्धन को दान करें. इस दिन मन को ईश्वर में लगाएं, क्रोध न करें,असत्य न बोलें.
संतान की कामना के लिए इस दिन क्या करें?
पति-पत्नी संयुक्त रूप से भगवान कृष्ण को पीला फल और पीले फूल अर्पित करें. एक साथ संतान गोपाल मंत्र का कम से कम 11 माला जाप करें. संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें. फल को पति-पत्नी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.
आर्थिक लाभ के लिए क्या करें?
भगवान कृष्ण को पीले फूलों की माला अर्पित करें. इसके बाद ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः का कम से कम 11 माला जाप करें. आर्थिक लाभ की प्रार्थना करें.
पाप नाश के लिए क्या उपाय करें?
भगवान कृष्ण को चन्दन की माला अर्पित करें. इसके बाद क्लीं कृष्ण क्लीं का 11 माला जाप करें. अर्पित की हुई चन्दन की माला को अपने पास रखें. पापों का प्रायश्चित होगा, पाप वृत्ति से छुटकारा मिलेगा. आपके नाम यश में वृद्धि होगी.