करनाल का सिद्ध पीठ शिव मंदिर: 125 फीट ऊंचा आस्था का केंद्र, तीसरे नेत्र में जड़े हैं हीरे

हरियाणा के करनाल शहर के पुराना सराफा बाजार में स्थित श्री सनातन धर्म शिव मंदिर श्रद्धा, विश्वास और आस्था का एक अनोखा केंद्र है. यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी भव्य ऊंचाई और विशेष संरचना के कारण भी दूर-दूर तक पहचान रखता है.

करनाल शिव मंदिर
gnttv.com
  • करनाल ,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

हरियाणा के करनाल शहर के पुराना सराफा बाजार में स्थित श्री सनातन धर्म शिव मंदिर श्रद्धा, विश्वास और आस्था का एक अनोखा केंद्र है. यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी भव्य ऊंचाई और विशेष संरचना के कारण भी दूर-दूर तक पहचान रखता है. करीब 125 फीट ऊंचा यह मंदिर उत्तर भारत के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है. महाशिवरात्रि और सावन माह के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, आलम यह रहता है कि सुबह चार बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं.

श्री सनातन धर्म शिव मंदिर का निर्माण वर्ष 1975-76 में किया गया था. करीब पांच दशक पुराने इस मंदिर को सिद्ध पीठ का दर्जा प्राप्त है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना भगवान भोलेनाथ जरूर पूरी करते हैं. यही कारण है कि करनाल जिले के अलावा आसपास के जिलों और यहां तक कि विदेशों से भी श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए इस मंदिर में पहुंचते हैं.

मंदिर में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा अष्टधातु से बनी हुई है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. अष्ट धातु को बेहद पवित्र माना जाता है और ऐसी प्रतिमाएं लंबे समय तक ऊर्जा और आस्था का केंद्र बनी रहती हैं. यहां भगवान शिव त्रिशूल और डमरू के साथ विराजमान हैं. मंदिर परिसर में एक शिवलिंग भी स्थापित है, जहां भक्तजन जल और दूध अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं.

शिवजी की तीसरी आंख में जड़ा है हीरा
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत भगवान शिव के तीसरे नेत्र में जड़ा हुआ हीरा है. मान्यता और भव्यता का यह प्रतीक श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. बताया जाता है कि यह हीरा करनाल से सांसद रहे अरविंद शर्मा द्वारा लगवाया गया था. तीसरे नेत्र में जड़ा यह हीरा मंदिर को एक अलग पहचान देता है और भक्तों के बीच श्रद्धा को और गहरा करता है.

हर मनोकामना होती है पूरी
तंग गलियों के बीच स्थित होने के बावजूद यह मंदिर अपनी ऊंचाई के कारण पूरे शहर में दूर से ही नजर आता है. 9 मंजिला इस मंदिर की हर मंजिल पर भगवान की विभिन्न मूर्तियां स्थापित हैं, जिससे ऊपर तक जाते-जाते भक्तों को एक आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव होता है. ऊपरी मंजिल से करनाल शहर का नजारा भी साफ दिखाई देता है.

मंदिर के पुजारी पिछले करीब 39 वर्षों से यहां पूजा-अर्चना कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि कोई श्रद्धालु लगातार 40 दिनों तक इस मंदिर में आकर सच्चे मन से भगवान शिव के सामने अपनी मनोकामना रखता है, तो भोलेनाथ उसकी इच्छा जरूर पूरी करते हैं. हर सोमवार, त्रयोदशी, शिवरात्रि, नागपंचमी और सावन के दिनों में यहां भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है.

रिपोर्टर: कमलदीप

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