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Karwa Chauth 2023: करवाचौथ पर सौ साल बाद बन रहा है ये खास योग...किस तरह होती है पूजा और क्या रखनी होती हैं सावधानियां, शुभ मुहूर्त से लेकर जानिए सबकुछ

सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के दिन पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. यह व्रत निर्जला रखा जाता है. पूजा करने के लिए सभी महिलाएं एकजुट होकर बैठती हैं और मध्य में सत्यवान और सावित्री की तस्वीर लगाती हैं.

करवाचौथ 2023
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:04 AM IST

हिंदू धर्म में करवाचौथ व्रत की बहुत मान्यता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और चांद को देखकर व्रत खोलती हैं. महिलाएं सोलह श्रंगार करके चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. इस बार ये त्योहार 1 नवंबर को पड़ रहा है.वहीं अगर शुभ मुहूर्त की बात करें को सुबह के पूजन के लिए एक नवंबर को सुबह 7.55 बजे से 09.18 बजे तक रहेगा. इसके बाद सुबह 10.41 बजे से दोपहर 12.04 बजे तक शुभ चौघड़िया में पूजा का मुहूर्त रहेगा. शाभ की पूजा 04.13 बजे से 05.36 बजे तक की जा सकती है. वहीं रात 08 बजकर 15 मिनट पर चंद्रदर्शन होंगे.

क्या बन रहा शुभ योग?
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार करवाचौथ पर पूरे सौ साल के बाद बुधादित्य योग बन रहा है. 1 नवंबर को बुध और मंगल एक साथ विराजमान रहेंगे. इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. शिव योग एक नवंबर को सुबह 7.34 बजे से लेकर सुबह 9.13 तक रहेगा. वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग 1 नवंबर को सुबह 06.33 बजे से 2 नवंबर की सुबह 04.36 बजे तक रहेगा. करवाचौथ वाले दिन 6.37 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू हो जाएगा. यह बहुत ही शुभ संयोग है. इस योद की जाने वाली पूजा या व्रत बहुत ही फलदायी होते हैं. इस बार करवाचौथ व्रत पर चंद्रमा भी अपनी उच्च राशि वृष में रहेंगे. इस वजह से सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी.

क्या है यह व्रत और क्या है इसका महत्व ?
कहा जाता है कि इस व्रत के बारे मैं कृष्ण ने द्रौपदी को बताया था तथा शिव ने पार्वती को. करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. मिट्टी के टोटीनुमा पात्र जिससे जल अर्पित करते हैं उसको करवा कहा जाता है और चतुर्थी तिथि को चौथ कहते हैं. इस दिन मूलतः भगवान गणेश ,गौरी तथा चंद्रमा की पूजा की जाती है. चंद्रमा को सामन्यतः आयु,सुख और शांति का कारक माना जाता है  इसलिए चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं वैवाहिक जीवन मैं सुख शांति तथा पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं. यह पर्व सौंदर्य प्राप्ति का पर्व भी है इसको मनाने से रूप और सौंदर्य भी मिलता है.

करवा चौथ के व्रत के नियम और सावधानियां क्या हैं ?
- केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया है ,ऐसी महिलाएं ही ये व्रत रख सकती हैं.
- यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है और इसे निर्जल या केवल जल पर ही रखा जाता है.
- व्रत रखने वाली कोई भी महिला काला या सफेद वस्त्र न पहनें.
- लाल वस्त्र सबसे अच्छा होता है ,पीला भी पहना जा सकता है.
- आज के दिन पूर्ण श्रंगार करना चाहिए.
- अगर कोई महिला अस्वस्थ है तो उसके स्थान पर उसके पति यह व्रत कर सकते हैं.

 

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