कहते हैं करवा चौथ व्रत के बारे में भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को और भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया था. करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. पंडित शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, दिन गुरुवार को रखा जाएगा.
मिट्टी के टोटीनुमा पात्र जिससे जल अर्पित करते हैं, उसको करवा कहा जाता है और चतुर्थी तिथि को चौथ कहते हैं. करवा चौथ के दिन मूलतः भगवान गणेश, गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है. चंद्रमा को सामन्यतः आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है. ऐसे में चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं. यह पर्व सौंदर्य प्राप्ति का पर्व भी है. इसको मनाने से रूप और सौंदर्य भी मिलता है. इस दिन सौभाग्य प्राप्ति के लिए रात्रि को प्रयोग भी किए जाते हैं, जो निष्फल नहीं होते हैं.
करवा चौथ के व्रत के नियम और सावधानियां
केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया है, ऐसी महिलाएं ही ये व्रत रख सकती हैं. यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाएगा. निर्जल या केवल जल पर ही व्रत रखें. व्रत रखने वाली कोई भी महिला काला या सफेद वस्त्र न पहने. लाल वस्त्र सबसे अच्छा है. आप पीला वस्त्र भी पहन सकती हैं. करवा चौथे के दिन पूर्ण शृंगार और पूर्ण भोजन जरूर करना चाहिए. अगर कोई महिला अस्वस्थ है तो उसके स्थान पर उसके पति यह व्रत कर सकते हैं.
सौभाग्य प्राप्ति का पहला प्रयोग (अगर पति-पत्नी में दूरियां हों )
मध्य रात्रि को पीले वस्त्र धारण करें. भगवान गणेश के समक्ष घी का दीपक जलाएं. उन्हें पीला वस्त्र और हल्दी की दो गांठ अर्पित करें. इसके बाद ॐ गं गणपतये नमः का जाप करें. पीले वस्त्र में हल्दी की गांठ बांधकर अपने पास रख लें.
सौभाग्य प्राप्ति का दूसरा प्रयोग (अगर पति-पत्नी में बिना कारण विवाद होता रहता हो)
मध्य रात्रि को लाल वस्त्र धारण करें. गणेश जी को पीपल के पत्ते पर रखकर सिंदूर अर्पित करें. इसके बाद ॐ रिद्धिसिद्धिविनायकाय नमः का जाप करें. सिंदूर को सुरक्षित रखें. इसका नियमित प्रयोग करते रहें.
सौभाग्य प्राप्ति का तीसरा प्रयोग (पति-पत्नी में प्रेम बढ़ाने के उपाय)
करवाचौथ की रात्रि को पीले या लाल वस्त्र धारण करें. एक लोटा जल में सफेद चंदन मिलाएं. नजर नीची करके चंद्रेदव को अर्घ्य दें. इसके बाद शिव जी का ध्यान करके निम्न मन्त्र का जप करें ॐ उमामहेश्वराभ्याम नमः. मन्त्र का जप करने के बाद वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ाने की प्रार्थना करें.
क्या आहार ग्रहण करके भी करवाचौथ की पूजा की जा सकती है
सामान्यतः करवाचौथ की पूजा निर्जल व्रत के साथ की जाती है लेकिन यदि स्वास्थ्य खराब है तो जल-फल लेकर या आहार ग्रहण करके भी करवाचौथ की पूजा की जा सकती है.