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251 किलो के महा मोदक का मां वैष्णवी को लगाया भोग, 100 साल पूरे होने पर धूमधाम से मन रहा उत्सव

शारदीय नवरात्रा में श्रद्धालुओं ने शक्तिपीठ माता के चरणों में 251 किलो यानी ढाई क्विंटल का महा मोदक(लड्डू) को चढ़ाकर मैया को भोग लगाया है. अति प्राचीन इस दुर्गा मंदिर का सौ साल पूर्ण होने वाला है और इसी उपलक्ष्य में नवरात्रा मां दुर्गा की पूजा अर्चना काफी धूमधान और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है.

मां शारदीय शक्तिपीठ दुर्गा को 251 किलो का विशाल मोदक से लगाया गया भोग
बिपुल राहुल
  • कटिहार ,
  • 12 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

कटिहार के प्राचीन मां वैष्णवी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. मंदिर के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती की जा रही है. इस मौके पर माता को 251 किलो यानी करीब ढाई क्विंटल का विशाल महा मोदक (लड्डू) चढ़ाया गया.

बिहार के कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड के अयोध्या गंज बाजार में स्थित मां वैष्णवी मंदिर का इतिहास करीब एक सदी पुराना है. इस मंदिर की स्थापना साल 1927 में कुरसेला एस्टेट के रायबहादुर रघुवंश नारायण सिंह ने कराई थी. कुछ साल बाद उन्होंने क्षेत्र में एक अन्य दुर्गा मंदिर का निर्माण कराया और मां वैष्णवी मंदिर को स्थानीय लोगों को सौंप दिया. इसके बाद से श्रद्धालु ही मंदिर की देखरेख करने लगे. मंदिर में संगमरमर की मां वैष्णवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है.

चूड़ी का टुकड़ा गिरने से शक्तिपीठ बनने की मान्यता
स्थानीय बुजुर्गों और प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर मां दुर्गा के हाथ की चूड़ी का एक टुकड़ा टूटकर गिरा था. इसी वजह से मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है. भक्तों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं. इसी आस्था के चलते नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार समेत कई जगहों से श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं.

बनारस की तर्ज पर हो रही महाआरती
मंदिर के सौवें स्थापना वर्ष के अवसर पर नवरात्रि में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. आरती के समय बनारस की तर्ज पर महाआरती हो रही है. दर्शन और पूजा के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं. इस दौरान 251 किलो के विशाल महा मोदक का भोग आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ माता की पूजा-अर्चना कर रहे हैं.

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