बिहार के लखीसराय जिले के बड़हिया में सुप्रसिद्ध सिद्ध मंगलापीठ माँ बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर है. इस मंदिर को जम्मू के मां वैष्णो देवी के संस्थापक श्रीधर ओझा ने स्थापित किया था. ऐसा मानना है कि मां वैष्णो देवी में जो शक्ति है, वही शक्ति बड़हिया के माँ बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर में है. जो श्रद्धालु मां वैष्णो देवी नहीं जा पाते हैं, वो बड़हिया आकर मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर आकर पूजा-अर्चना करते है. शारदीय नवरात्र में मंदिर को पूरी तरह से सजाया जाता है.
भव्य है माता का मंदिर-
लोक आस्था का केंद्र मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर(महारानी स्थान) ऐतिहासिक है. मां बाला त्रिपुर सुंदरी का भव्य और विशाल मंदिर सफेद संगमरमर का है. यह मंदिर 151 फीट ऊंचा है. मंदिर के गुंबज पर सजे स्वर्ण कलश कोसो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. इसे कामना पूर्ति मंदिर भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि जिसे भी सर्प दंश होता है, उसे इस मंदिर में लाकर यहां के कुएं के पानी से उसे स्नान कराया जाता है. मान्यता है कि इससे सर्प दंश से पीड़ित लोग ठीक जाते हैं.
सैकड़ों साल पुराना है मंदिर-
पौराणिक मान्यता के अनुसार बड़हिया गांव की स्थापना पालवंश के काल में हुआ माना जाता है. पंडित श्रीधर ओझा बड़हिया के ही मूल निवासी थे. हिमालय की गुफा में तपस्या करने के दौरान मां वैष्णो देवी की स्थापना के बाद उन्होंने बड़हिया में माँ बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा (महारानी स्थान) को स्थापित किया था. उस वक्त बड़हिया गांव के पूरब में गंगा तथा पश्चिम में हरूहर नदी बहती थी और यह क्षेत्र जंगलों से घिरा था. सैकड़ों विषधर सर्प भी प्रवास करते थे.
माता त्रिपुर सुंदरी ने बताया था सर्पदंश मुक्ति का उपाय-
ग्रामीणों की सर्पदंश से हो रही मौत से निजात दिलाने के लिए भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा ने आराध्य देवी की आराधना की. भक्त की पुकार सुनकर माँ बाला त्रिपुर सुंदरी प्रकट हुई. मां से श्रीधर ओझा ने सर्पदंश से निजात दिलाने की मांग की. माँ बाला त्रिपुर सुंदरी ने सर्पदंश से मुक्ति का उपाय बताया. भक्त श्रीधर ओझा ने माँ को बड़हिया में स्थापित किया और माँ बाला त्रिपुर सुंदरी द्वारा बताए गए मंत्र से सर्प दंश से पीड़ित लोगों का उपचार करने लगे.
मंदिर में क्या है खास?
हर मुराद पूरी करती हैं मां- मुख्य पुजारी
मुख्य पुजारी दिग्विजय कुमार झा ने बताया कि यह मंदिर सिद्ध शक्तिपीठ है. यहां स्वच्छ एवं पवित्र मन से मांगी गई हर मुरादें मां जरूर पूरी करती है. मनोकामनाओं से फलीभूत होने वाले आस्थावान श्रद्धालु इस मंदिर को कामना पूर्ति मंदिर भी कहते हैं. त्रिपुर सुंदरी मां दुर्गा का ही रूप हैं. मां जगदंबा यहां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के साथ पिंड स्वरूप में विराजती हैं. ऐसी मान्यता है कि बाल स्वरूप में विराजने वाली मां सहज ही अपने भक्तों की पुकार को सुनकर मुराद पूरी करती है.
उन्होंने बताया कि इसी का प्रतिफल है कि हर मंगलवार व शनिवार को दूर दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन पूजन को पहुंचते हैं. शारदीय और वासंती नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है. उन्होंने बताया कि लखीसराय और बड़हिया वासी हर शुभ कार्य मां के दरबार से ही शुरू करते हैं. वहीं लोगों को जब भी कोई संकट या विपत्ति आती है तो मां के दर्शन मात्र से ही वह टल जाता है. माँ बाला त्रिपुर सुंदरी माता की पूजा-अर्चना के लिए यहां काफी संख्या में देश विदेश एवं आसपास और दूर दराज से भी महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं का आगमन होता रहता है. यहां नवरात्र में काफी भीड़ जुटती है. इसके अलावा मुंडन और उपनयन संस्कार के लिए भी लोग आते हैं. मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के लिए श्रीधर सेवाश्रम की स्थापना की है. इसमें धार्मिक आयोजन के साथ ही श्रद्धालुओं के ठहरने की उत्तम व्यवस्था की गई है.
भक्तों का क्या कहना है?
वहीं, बड़हिया की श्रद्धालु सोनी कुमारी ने बताया कि मैं माता से जो भी चीजें मांगी हूँ, माता ने मांगे पूरी की है. यहाँ पूजा करने आती हूँ तो बहुत अच्छा लगता है.
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