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मुस्लिम बेगम ने रखी थी इस हनुमान मंदिर की नींव, शिखर पर चांद-तारा... जानिए लखनऊ की गंगा-जमुनी विरासत की कहानी

लखनऊ एक ऐसा अनोखा शहर है, जहां कई मंदिर और इमामबाड़े की मिलीजुली हिन्दू-मुस्लिम सभ्यता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. इसी लखनऊ के अलीगंज में एक ऐसा ही हनुमान मंदिर है, जिसे पुराना हनुमान मंदिर भी कहा जाता है.

Unique Hanuman Temple
gnttv.com
  • लखनऊ,
  • 18 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:36 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अपनी तहजीब और नवाबों के इतिहास के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवाबों के इस शहर में एक ऐसा ऐतिहासिक हनुमान मंदिर भी है, जिसकी नींव एक मुस्लिम बेगम ने रखी थी? जी हां, हम बात कर रहे हैं लखनऊ के अलीगंज में स्थित पुराने हनुमान मंदिर की. यह मंदिर न सिर्फ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की सबसे खूबसूरत मिसाल भी है. तो आइए जानते हैं इस मंदिर की अनसुनी कहानी और इसके पीछे की अनोखी मान्यताएं.

इस मंदिर का इतिहास करीब 200 साल से भी ज्यादा पुराना है. मान्यताओं के अनुसार, अवध के तीसरे नवाब की पत्नी आलिया को कोई संतान नहीं हो रही थी. उन्होंने कई मन्नतें मांगीं, जिसके बाद उन्हें सपने में भगवान हनुमान की मूर्ति के दर्शन हुए. सपने के निर्देशानुसार, बेगम ने अलीगंज के पास एक टीले की खुदाई करवाई, जहां से वास्तव में बजरंग बली की एक भव्य मूर्ति निकली. इसके बाद बेगम के आंगन में किलकारी गूंजी और उन्होंने नवाब आसफउद्दौला को जन्म दिया. संतान प्राप्ति की खुशी में बेगम ने बड़े ही आदर के साथ इस मंदिर का निर्माण करवाया.

मंदिर के शिखर पर चांद-तारा का चिह्न
इस मंदिर की वास्तुकला में भी सांप्रदायिक सौहार्द की झलक मिलती है. मंदिर के शिखर पर आपको आज भी चांद-तारा का चिह्न देखने को मिलेगा, जो अवध के नवाबों के शाही प्रतीक और इस मंदिर के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है.

जेठ के महीने में मनाया जाता है बड़ा मंगल उत्सव
लखनऊ का सुप्रसिद्ध बड़ा मंगल उत्सव जो जेठ के महीने में मनाया जाता है वो इसी मंदिर से शुरू हुआ था. इस दौरान पूरे लखनऊ में हजारों भंडारे लगते हैं, जिसकी नींव भी इसी मंदिर के इतिहास से जुड़ी है. अवध काल में शुरू हुई यह परंपरा आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है. बड़े मंगल पर लगने वाले हजारों भंडारों की नींव भी इसी मंदिर की सेवा परंपरा से जुड़ी है. यही वजह है कि ज्येष्ठ माह का हर मंगलवार लखनऊ में केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दान, सेवा और गंगा-जमुनी तहजीब के महापर्व के रूप में मनाया जाता है. अलीगंज का यह मंदिर आज भी इस ऐतिहासिक परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां से शुरू हुई सेवा और श्रद्धा की यह धारा पूरे लखनऊ समेत अन्य शहरों में प्रवाहित होती है.

रिपोर्टर: अंकित मिश्रा

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