Durlabh Sanyog: पौष पर्णिमा पर 75 साल बाद बन रहा था दुर्लभ संयोग, जानें क्यों खास है इस बार का माघ मेला

इस साल 3 जनवरी से माघ मेले की शुरुआत हो रही है. इस बार 75 साल बाद खास संयोग बन रहा है. पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से शुरू होने वाले इस मेले में 75 वर्षों बाद दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं.

Magh Mela
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST

तीर्थराज प्रयागराज में 3 जनवरी से माघ मेले का शुभारंभ हो रहा है. पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से शुरू होने वाले इस मेले में 75 वर्षों बाद दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं. इस बार माघ मेले में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण यह समय अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है. माघ मेले की अवधि 15 फरवरी तक रहेगी, जिसमें छह मुख्य स्नान पर्व आयोजित किए जाएंगे.

कब से कब तक है पौष पूर्णिमा?
पौष पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है. इस दिन गंगा स्नान और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है. इस बार पौष पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ 2 जनवरी की शाम 6:53 बजे होगा और इसका समापन 3 जनवरी को दोपहर 3:32 बजे होगा. इस दिन संगम तट पर लाखों श्रद्धालु पुण्य स्नान करेंगे.

75 साल बना रहा ये संयोग-
इस साल पौष पूर्णिमा की शुरुआत 3 जनवरी को हो रही है. 75 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन हो रही है. 75 साल बाद रविवार को मकर राशि में प्रवेश करेंगे.

माघ मेले की विशेषताएं
माघ मेला पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है. इस बार मेले में दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं, जैसे भ्रमयोग, इंद्रयोग और शिवासयोग। इन संयोगों में लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है. 75 वर्षों बाद सूर्यदेव अपने दिन रविवार को मकर राशि में रहेंगे, जो अत्यंत शुभ माना जा रहा है.

कल्पवासियों की तपस्या-
माघ मेले में कल्पवासियों का आगमन शुरू हो चुका है. ये श्रद्धालु एक महीने तक संगम तट पर रहकर कठिन तप और साधना करते हैं. कल्पवासियों की दिनचर्या में गंगा स्नान, एक समय भोजन, जमीन पर शयन और भजन-कीर्तन शामिल है. मान्यता है कि इस तपस्या से अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

माघ मेले में श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का आयोजन किया जा रहा है. ओम नमः शिवाय नामक संस्था द्वारा सात स्थानों पर विशाल भंडारे चलाए जा रहे हैं, जहाँ हजारों श्रद्धालु निशुल्क भोजन ग्रहण कर रहे हैं. भंडारों में अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान माना जाता है.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम-
माघ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है. पूरे मेले क्षेत्र को सात सेक्टरों में बाँटा गया है और 17 थाने तथा 42 पुलिस चौकियाँ स्थापित की गई हैं. 400 एआई आधारित कैमरों से मेले की निगरानी की जा रही है.

माघ मेले की दिव्यता और भव्यता हर साल श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. इस बार 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मेले को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं.

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