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Magh Mela: माघ मेले में सतुवा बाबा का अनोखा आश्रम, 350 सालों से है सत्तू और चीनी बांटने की परंपरा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम तट पर माघ मेला चल रहा है. यह मेला आस्था और परंपरा का संगम है. इस बार मेले में एक अनोखा सतुवा बाबा कैंप लगा है. यहां प्रसाद के रूप में सत्तू और चीनी बांटी जाती है, जो सालों पुरानी परंपरा है.

Satuwa Baba Camp
gnttv.com
  • प्रयागराज,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:10 PM IST

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. देशभर से करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. पवित्र संगम तट पर लगने वाले माघ मेला में आस्था का अनोखा संगम होता है. यहां हर पंडाल की अपनी विशेषताएं हैं, जहां पूजा-पाठ के बाद प्रसाद के रूप में फल, पंजीरी, गुड़ और तिल के लड्डू बांटे जाते हैं. लेकिन एक कैंप ऐसा है, जो अपनी विशिष्टता के लिए अलग पहचान सतुवा बाबा कैंप रखता है. यहां प्रसाद के रूप में सत्तू और चीनी बांटी जाती है, जो वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक है.

350 साल पुरानी परंपरा-
सतुवा प्रसाद की प्राचीन परंपरा करीब 350 वर्ष पुरानी बताई जाती है. महामंडलेश्वर श्री संतोष दास सतुवा बाबा के अनुसार, प्रथम स्वामी चने का प्रसाद भगवान शिव के स्वरूप में बांटते थे. एक बार भगवान शिव स्वयं सेवा करने के लिए यहां आए. उन्होंने महाराज जी को निर्देश दिया कि हमेशा सत्तू और गुड़ का प्रसाद ही बांटें. प्रसाद लेते ही वे अदृश्य हो गए. तब से यह परंपरा चली आ रही है.

श्रद्धा और आशीर्वाद से भरा प्रसाद-  सतुवा बाबा
पूर्वज आचार्यों ने भी इसी रूप में प्रसाद वितरण जारी रखा, क्योंकि यह समाज को सरल और पौष्टिक लगता है. सतुवा बाबा कहते हैं कि यह प्रसाद श्रद्धा और आशीर्वाद से भरा है. सतुवा बाबा कैंप में इस प्रसाद को पाने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं. स्वयं जगद्गुरु महामंडलेश्वर श्री संतोष दास सतुवा बाबा अपने पवित्र हाथों से प्रसाद वितरित करते हैं.

माघ मेला के अलावा, यह पीठ वर्ष भर सक्रिय रहता है और आने वाले हर श्रद्धालु को यह विशेष प्रसाद मिलता है. सत्तू न केवल पौष्टिक है, बल्कि सर्दियों में ऊर्जा प्रदान करने वाला भी माना जाता है.

माघ मेले का भव्य आयोजन-
माघ मेले का आयोजन हर साल पौष पूर्णिमा के दिन शुरू होता है और महाशिवरात्रि तक चलता है. साल 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी से हुई है और यह 14 फरवरी तक चलेगा. माघ मेले में मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर स्नान होगा. यह धार्मिक आयोजन आस्था और परंपरा का अनूठा संगम है.

(आनंद राज की रिपोर्ट)

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