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Magh Mela 2026: भगवा स्कूटी, भगवा हेलमेट, भगवा गदा... माघ मेले में भगवान हनुमान के अनोखे भक्त

प्रयागराज के माघ मेले में अनोखे साधु-संत दिखाई दे रहे हैं. ऐसे ही एक संत 65 साल के स्वामी अमोहा नंद महाराज हैं. ये संत भगवा रंग की गाड़ी, भगवा रंग का हेलमेट के साथ चलते हैं. स्वामी अमोहा जमींदार फैमिली से आते हैं. वो बचपन से ही भगवान हनुमान के भक्त हैं.

Unique Hanuman devotee
gnttv.com
  • प्रयागराज,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:33 PM IST

प्रयागराज संगम की रीत पर लगने वाले माघ मेले में साधु-संतों के रूप के अलावा कई ऐसे चेहरे भी दिखते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान के नाम समर्पित कर दिया है. ऐसे ही एक शख्स 65 साल के स्वामी अमोहा नंद महाराज हैं. वे स्कूटी पर मेला क्षेत्र में घूमते नजर आते हैं. उनके सिर पर केसरिया रंग का हेलमेट है, जिसमें भगवान हनुमान, राम मंदिर और अनेक झंडियों की तस्वीरें लगी हैं. हनुमान जी से उनका विशेष लगाव है.

बचपन से हनुमान का भक्त- स्वामी अमोहा
स्वामी जी बताते हैं कि मैं विवेकानंद आश्रम का सन्यासी हूं. आश्रम आने से पहले भी बचपन से हनुमान जी का भक्त था. इसलिए मुझे केसरिया हेलमेट चाहिए था. पहले ब्राउन कलर का हेलमेट था, लेकिन नया केसरिया हेलमेट देखा तो खुशी हुई. इसमें हनुमान जी, राम जी, अयोध्या राम मंदिर और झंडियां सब लगी हैं. दुकानदार सिख था, इसलिए राम जी की तस्वीर पीछे धागे से बंधी रखी थी.

संत की गाड़ी अलग होने की मांग की-
स्वामी जी कहते हैं कि संत का गाड़ी आम आदमी से अलग होना चाहिए. हमारा आश्रम हनुमान जी का है. यहां सुबह पूजा और शाम को आरती होती है, जो मैं ही करता हूं. इसलिए स्कूटर पर हनुमान जी आश्रम का चिन्ह लगाया है. साथ ही गंगाजल का डिब्बा भी रखा है. मैं शिव जी का भी भक्त हूं, गंगाजल भरकर शिव जी को चढ़ाने ले जाता हूं.

जमींदार परिवार से संन्यास तक की कहानी-
अमोहा नंद महाराज जमींदार परिवार के बड़े बेटे हैं. वे बताते हैं कि बीए में हिंदी ऑनर्स पढ़ते समय गौतम बुद्ध जी को पढ़ा. उनके जीवन से प्रेरित होकर साधु जीवन जीनने की इच्छा हुई. साधु बनकर मनुष्य जीवन का लक्ष्य प्राप्त करना मेरा उद्देश्य है. पढ़ाई के बाद विवेकानंद आश्रम चला गया. आश्रम अविवाहित और 26 वर्ष तक के युवाओं को ही लेता है. गौतम बुद्ध राजकुमार थे, उनके पास पत्नी-बच्चे थे, फिर भी त्याग किया. मैं तो अविवाहित था.

रामकृष्ण मिशन से प्रेरित- स्वामी अमोहा नंद
अमोहा नंद महाराज ने बताया कि आश्रम में सुबह 5 बजे पूजा शुरू होती है, जो 9 से 10 बजे तक चलती है. शाम 6:30 बजे आरती होती है. स्वामी जी कहते हैं कि रामकृष्ण मिशन से प्रेरित होकर यह जीवन जिया. अमोहा नंद महाराज का यह अनोखा रूप माघ मेला की भक्ति यात्रा को और जीवंत बनाता है.

(आनंद राज की रिपोर्ट)

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