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भारत हिंदू राष्ट्र बने... इस संकल्प के साथ मध्य प्रदेश से निकले कांवड़िये, गले में शिव की मूर्ति लटकाकर पहुंचे प्रयागराज

मध्य प्रदेश से आए इस कांवड़िया दल का कहना है कि वे केवल जलाभिषेक के लिए नहीं, बल्कि एक विशेष संकल्प के साथ यात्रा पर निकले हैं. उनका उद्देश्य भगवान शिव से प्रार्थना करना है कि भारत हिंदू राष्ट्र बने और सनातन धर्म का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार हो.

Kanwariyas
आनंद राज
  • प्रयागराज,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST
  • दशाश्वमेध घाट से भरा गंगाजल
  • बैजनाथ धाम और काशी विश्वनाथ में करेंगे जलाभिषेक

सावन मास का पहला सोमवार बीतने के बाद प्रयागराज में कांवड़ियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु गंगा जल लेने संगम नगरी पहुंच रहे हैं. इन्हीं कांवड़ियों के बीच मध्य प्रदेश से आए एक ग्रुप ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. इसकी वजह इनका अनोखा गेटअप था. ग्रुप के सभी सदस्य अपने गले में सफेद रंग की भगवान शिव की प्रतिमा धारण किए हुए थे, जो उन्हें बाकी कांवड़ियों से अलग पहचान दे रही थी.

हिंदू राष्ट्र बनाने का लिया संकल्प
मध्य प्रदेश से आए इस कांवड़िया दल का कहना है कि वे केवल जलाभिषेक के लिए नहीं, बल्कि एक विशेष संकल्प के साथ यात्रा पर निकले हैं. उनका उद्देश्य भगवान शिव से प्रार्थना करना है कि भारत हिंदू राष्ट्र बने और सनातन धर्म का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार हो. कांवड़ियों का कहना है कि वे कई वर्षों से सावन में कांवड़ यात्रा करते आ रहे हैं और हर बार किसी न किसी धार्मिक संकल्प के साथ यात्रा करते हैं.

दिल के करीब हैं भगवान शिव
ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि भगवान शिव उनके इष्टदेव हैं. इसी वजह से उन्होंने शिव की प्रतिमा को अपने गले में धारण किया है. उनका कहना है कि यह केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भगवान शिव को अपने हृदय के सबसे करीब रखने का भाव है. सफेद रंग की प्रतिमा पहनकर वे पूरी यात्रा कर रहे हैं, जिससे हर पल उन्हें अपने आराध्य का स्मरण होता रहे.

प्रयागराज से भरा गंगाजल, कई शिवालयों में करेंगे जलाभिषेक
कांवड़ियों ने प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से गंगाजल भरा. उनका मानना है कि यहां से लिया गया पवित्र जल भगवान शिव पर अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. प्रयागराज के बाद यह दल बैजनाथ धाम और काशी विश्वनाथ समेत कई प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक करेगा. कांवड़ियों का कहना है कि उनकी यात्रा का उद्देश्य भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ सनातन संस्कृति के प्रति लोगों में आस्था और जागरूकता बढ़ाना भी है.

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