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Panchak 2026: जून और जुलाई 2026 में बनने जा रहा मृत्यु पंचक का संयोग, जानिए तिथि, समय, सावधानियां और राशि पर असर

जून और जुलाई 2026 में एक महीने के भीतर दो बार मृत्यु पंचक का संयोग बन रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. जानिए मृत्यु पंचक की तिथि, समय, प्रभाव, किन कार्यों से बचना चाहिए और सालभर के पंचक कैलेंडर की पूरी जानकारी.

Panchak June and July timing
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

ज्योतिष शास्त्र में पंचक को विशेष महत्व दिया गया है. जब पंचक की शुरुआत शनिवार से होती है, तो उसे मृत्यु पंचक कहा जाता है. इसे पंचक के अपेक्षाकृत संवेदनशील रूपों में माना जाता है. सतर्कता बरतने वाली बात ये है कि जून और जुलाई 2026 में 30 दिनों के भीतर दो बार मृत्यु पंचक का संयोग बन रहा है. ऐसे में कई लोग इसकी तिथि, समय और प्रभाव के बारे में जानना चाहते हैं.

क्या होता है मृत्यु पंचक?
पंचक तब बनता है जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में भ्रमण करता है. यह अवधि लगभग पांच दिनों तक रहती है. पंचक की शुरुआत जिस वार से होती है, उसी आधार पर उसका स्वरूप तय किया जाता है. शनिवार से शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है.

जून 2026 में कब लगेगा मृत्यु पंचक?
जून महीने का मृत्यु पंचक 6 जून 2026, शनिवार शाम करीब 7 बजे शुरू हो चुका है और 11 जून 2026, गुरुवार सुबह लगभग 8:16 बजे समाप्त होगा.

जुलाई 2026 में फिर बनेगा वही योग
जुलाई में भी मृत्यु पंचक का संयोग बन रहा है. यह पंचक 4 जुलाई 2026, शनिवार करीब 12:45 बजे शुरू होगा और 8 जुलाई 2026, बुधवार शाम लगभग 4 बजे समाप्त होगा.

किन राशियों को रहना चाहिए सतर्क?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान जिन राशियों पर शनि, राहु या चंद्रमा का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक होता है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. विशेष रूप से मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों को इस दौरान स्वास्थ्य, यात्रा, विवाद और आर्थिक निर्णयों में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. हालांकि यह सामान्य ज्योतिषीय मान्यताएं हैं. किसी व्यक्ति पर वास्तविक प्रभाव उसकी व्यक्तिगत कुंडली, ग्रह दशा और गोचर पर भी निर्भर कर सकता है.

मृत्यु पंचक में किन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान कुछ कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है. जैसे-

बड़े आर्थिक निवेश
अनावश्यक जोखिम लेना
विवाद या झगड़े में पड़ना
बिना तैयारी लंबी यात्रा शुरू करना
महत्वपूर्ण निर्णय जल्दबाजी में लेना

धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान भगवान शिव, विष्णु या अपने इष्ट देव की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य को शुभ माना जाता है.

जून से दिसंबर तक कब-कब रहेगा पंचक?
क्योंकि 2026 का आधा महीना खत्म हो चुका है. जून से दिसंबर का तक का महीना इस साल शेष है. तो जनते हैं कि बाकी महीनों में कब और कौन सा पंचक लग रहा है. 2026 में जून के बाद पंचक की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं-

6 जून से 11 जून
4 जुलाई से 8 जुलाई
31 जुलाई से 4 अगस्त
27 अगस्त से 1 सितंबर
23 सितंबर से 28 सितंबर
21 अक्टूबर से 25 अक्टूबर
17 नवंबर से 22 नवंबर
14 दिसंबर से 19 दिसंबर
हालांकि केवल जून और जुलाई में ही केवल मृत्यु पंचक का योग है, बाकी महीनों में सामान्य पंचक योग हैं. 

 

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