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Devi Kavach: देवी कवच का क्या है महत्व? जानें इसका पाठ किन दशाओं में है विशेष लाभकारी 

Navratri 2026: देवी कवच मार्कंडेय पुराण और दुर्गासप्तशती का एक अत्यंत शक्तिशाली और रक्षक स्रोत है. इसका उपदेश ब्रह्मा जी ने ऋषि मार्कंडेय को दिया था. देवी कवच का पाठ करने से अकाल मृत्यु, तंत्र-मंत्र, मुकदमे आदि बाधाओं से व्यक्ति बचा रहता है. यहां तक कि इसका पाठ मनचाही वस्तुओं की प्राप्ति भी करा देता है.

Navratri 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:14 PM IST

शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ हो गया है. आज हम आपको देवी कवच के बारे में बता रहे हैं. देवी कवच जिसे दुर्गा कवच भी कहा जाता का उपदेश ब्रह्मा जी ने श्री  मार्कंडेय ऋषि को किया था. देवी कवच मार्कंडेय पुराण और दुर्गासप्तशती का एक अत्यंत शक्तिशाली और रक्षक स्रोत है. इस कवच में अपूर्व शक्ति है. इसमें देवी के विभिन्न नामों और शक्तियों का उल्लेख है. इसके पाठ से व्यक्ति हर प्रकार से सुरक्षित हो जाता है. देवी कवच का पाठ करने से अकाल मृत्यु, तंत्र-मंत्र, मुकदमे आदि बाधाओं से व्यक्ति बचा रहता है. यहां तक कि इसका पाठ मनचाही वस्तुओं की प्राप्ति भी करा देता है. 

क्या है देवी कवच?
आपको मालूम हो कि देवी कवच दुर्गा सप्तशती की शुरुआत में लिखा गया ऐसा पाठ है जो 18 पुराणों में से एक मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती का प्रमुख हिस्सा है. इस कवच में ब्रह्मा जी, माता पार्वती की नौ अलग-अलग दैवीय रूपों की प्रशंसा करते हैं. ब्रह्मा जी कहते हैं जो भी व्यक्ति श्री दुर्गा सप्तशती के कवच का नित्य पाठ करता है, माता दुर्गा का आशीर्वाद उसके जीवन में सदैव बना रहता है. ऐसे में जब भी कोई व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करता है तो सबसे पहले कवच का पाठ करना जरूरी होता है. इस पाठ को भक्तों के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है.

देवी कवच का पाठ किन दशाओं में है विशेष लाभकारी? 
1.
यदि स्वास्थ्य की समस्या निरंतर बनी रहती हो
2. अगर एक से ज्यादा रोगों से परेशान हों
3. अगर किसी भी तरह रोग का निवारण न हो पा रहा हो
4. अगर तंत्र मंत्र आदि क्रियाओं से परेशान हों
5. अगर मुकदमेबाजी में फंसे हुए हों
6. अगर शत्रु और विरोधी लगातार नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हों

देवी कवच का पाठ और प्रयोग कैसे करें? 
नित्य प्रातः या मध्य रात्रि में देवी कवच का पाठ करें. देवी के समक्ष घी का एक दीपक जलाएं. इसके बाद सामने एक जल का पात्र भी रखें. इसके बाद दुर्गा कवच का पाठ करें. पाठ के थोड़ी देर बाद सामने रखे जल को अपने ऊपर छिड़क लें. अगर किसी विशेष हिस्से में समस्या है तो उस हिस्से पर जल लगाएं. इसको भोजपत्र पर लिखकर गले में धारण करना अमोघ होता है. इसका प्रयोग करने वाले व्यक्ति को सात्विक रहना चाहिए. 

 

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