सनातन में एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. सालभर में 24 एकादशी आती हैं. लेकिन इसमें निर्जला एकदशी का अपना अलग महत्व है. इस बार 24 जून 2026 को निर्जला एकादशी शुरू हो रही है और 25 जून को समाप्त होगी. इस एकादशी में अन्न-जल ग्रहण करने की मनाही होती है. इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है. इस बार निर्जला एकादशी पर भद्रा का साया रहने वाला है.
निर्जला एकादशी के दिन भद्रा कब लगेगी?
निर्जला एकादशी पर बनने वाले शुभ संयोग से इसका महत्व और भी बढ़ गया है. इस दिन शिव, साध्य और रवि योग का संयोग बन रहा है. ये अत्यंत शुभ माना जाता है. हालांकि इस निर्जला एकादशी पर भद्रा का साया रहेगा. एकादशी के दिन भद्रा सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगी और शाम 4 बजकर 39 मिनट पर खत्म होगी.
निर्जला एकादशी पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या है?
एकादशी तिथि 24 जून को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और 25 जून को शाम 4 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी. निर्जला एकादशी पर दान का काफी विशेष महत्व है. इस साल स्नान-दान के लिए शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजकर 56 मिनट से सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक, प्रात: संध्या में सुबह 5 बजकर एक मिनट से सुबह 5 बजकर 48 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर एक बजकर 21 मिनट और दोपहर 2 बजकर 26 मिनट तक है.
क्या भद्रा काल में पूजा की जा सकती है?
हिंदू धर्म में भद्रा काल को शुभ नहीं माना जाता है. इस समय में शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है. भद्रा काल में गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह और नया व्यापार शुरू करने जैसा काम नहीं किया जाता है. हालांकि इस काल में घर या मंदिर में नियमित पूजा की जा सकती है. लेकिन किसी मनोकामना वाली पूजा या सत्यनारायण कथा जैसे अनुष्ठान नहीं करना चाहिए.
निर्जला एकादशी व्रत पारण कब?
निर्जला एकादशी का व्रत काफी कठिन होता है. इसमें सूर्योदय के साथ व्रत शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय के साथ पारण किया जाता है. व्रत पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 49 मिनट से सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक रहेगा.
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