Nirjala Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत ही अधिक महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. एक साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है, जिसमें निर्जला एकादशी बहुत ही खास स्थान रखती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सिर्फ एक निर्जला एकादशी का एक व्रत रखने से 24 एकदिवशियों के बराबर फल मिलता है. निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत को बिना अन्न-जल ग्रहण किए पूरा किया जाता है. निर्जला एकादशी व्रत के नियम बहुत कड़े हैं. आज हम आपको बता रहे हैं कि निर्जला एकादशी पर भूलकर भी कौन सी 5 गलतियां नहीं करनी चाहिए. यदि आप ये गलतियां करेंगे तो व्रत को तो पूरा फल मिलेगा नहीं, ऊपर से आप पर पाप भी चढ़ जाएगा.
किस दिन रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत
हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 24 जून को शाम 6:12 बजे होगा और इसका समापन अगले दिन 25 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा. निर्जला एकादशी व्रत का पारण के लिए शुभ समय 26 जून को सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट के बीच है.
निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
1. न करें जल पीने की भूल
निर्जला एकादशी व्रत को बिना अन्न-जल ग्रहण किया जाता है. इस व्रत को रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन और रात बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं. ऐसे में भूलकर भी पानी नहीं पीना चाहिए. निर्जला एकादशी व्रत करने के दौरान पानी ग्रहण करना व्रत की मर्यादा को भंग कर सकता है. इस दिन मुंह की सफाई के लिए पानी से कुल्ला कर सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि कुल्ले का पानी अंदर निगलना नहीं है. ऐसा करने से व्रत टूट सकता है.
2. अन्न का न करें सेवन
निर्जला एकादशी का व्रत रखने के दौरान भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए. धर्मग्रंथों में विशेष रूप से चावल खाने की मनाही बताई गई है. निर्जला एकादशी के दिन चावल खाने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है. ऐसे में इस दिन भूलकर भी चावल के सेवन न करें. इस दिन व्रती को केवल व्रत नियमों के अनुसार ही आहार ग्रहण करना चाहिए.
3. न करें तामसिक भोजन और नशे से रहें दूर
निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने वालों को तो तामसिक भोजन नहीं ही करना चाहिए अन्य लोगों को भी इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन शराब और धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए. आपको मालूम हो कि निर्जला एकादशी का पर्व सिर्फ भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का भी पर्व है.
4. निर्जला एकादशी के दिन भूलकर भी न तोड़ें तुलसी के पत्ते
भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना में तुलसी के पत्तों का विशेष महत्व है, लेकिन निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़ना शुभ नहीं माना जाता. यदि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल की जरूरत हो तो इसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए. ऐसे धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन माता तुलसी विश्राम करती हैं. ऐसे में इस दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए.
5. निर्जला एकादशी के दिन क्रोध, झूठ और वाद-विवाद से बचें
निर्जला एकादशी व्रत के दिन मन को संयमित रखना चाहिए. इस दिन ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरे को कष्ट पहुंचे. निर्जला एकादशी के दिन किसी का अपमान करना, झूठ बोलना, गुस्सा करना या विवाद में पड़ना अशुभ माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए मन में शांति, दया और सकारात्मक विचार रखना चाहिए. सिर्फ इस दिन ही नहीं बल्कि हर दिन विनम्र व्यवहार रखने का प्रयास करना चाहिए.